दिनभर मेहनत कर महज कुछ सौ रुपये कमाने वाले जितेंद्र को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब इनकम टैक्स विभाग ने उन्हें 598 करोड़ 50 लाख 37 हजार 726 रुपये का डिमांड नोटिस भेज दिया.
हीरे-जवाहरात कारोबार के भारी-भरकम ट्रांजेक्शन दर्ज
नोटिस देखते ही जितेंद्र के होश उड़ गए. उन्हें समझ ही नहीं आया कि आखिर उनके नाम पर इतना बड़ा कारोबार कैसे हो गया. घबराए जितेंद्र तुरंत वकील के पास पहुंचे. जांच में सामने आया कि इनकम टैक्स रिकॉर्ड में उनके नाम पर हीरे-जवाहरात के कारोबार से जुड़े भारी-भरकम ट्रांजेक्शन दर्ज हैं, जबकि हकीकत यह है कि जितेंद्र का इस तरह के किसी भी व्यापार से कोई लेना-देना नहीं है. वे सिर्फ कपड़े प्रेस कर अपने परिवार का गुजारा करते हैं.
दो साल पहले खोया था पैन कार्ड और आधार कार्ड
शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि करीब दो साल पहले जितेंद्र का पैन कार्ड और आधार कार्ड खो गया था. आशंका है कि इन्हीं दस्तावेजों का दुरुपयोग कर किसी ने बैंक खाते खुलवाए, जीएसटी नंबर जारी कराया और फर्जी फर्म के जरिए करोड़ों का लेनदेन किया. बताया जा रहा है कि गुजरात के सूरत में एक कंपनी बनाकर इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए गंज थाने में एफआईआर दर्ज कर दी गई है और पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है. वहीं इनकम टैक्स विभाग ने भी संबंधित बैंक अधिकारियों से जवाब तलब किया है कि आखिर इतने बड़े ट्रांजेक्शन के बावजूद अलर्ट क्यों नहीं किया गया?
बैंकिंग सिस्टम पर खड़े हुए बड़े सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने बैंकिंग सिस्टम और पहचान दस्तावेजों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. एक गरीब मजदूर के नाम पर सैकड़ों करोड़ का लेनदेन होना यह दिखाता है कि सिस्टम में कहीं न कहीं बड़ी खामी है.
वहीं, इस मामले के बाद जितेंद्र बाड़ोलिया मानसिक और आर्थिक रूप से बेहद परेशान हैं. उन्हें अब अपने बेगुनाह होने को साबित करने के लिए दफ्तरों और थानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. यह घटना साफ तौर पर चेतावनी है कि पहचान की सुरक्षा में जरा सी लापरवाही किसी की जिंदगी को संकट में डाल सकती है.
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