पीड़ित संजय कुमार ने बताया कि 6 अप्रैल को उनके पास एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आई. कॉल करने वाला व्यक्ति वर्दी में था और उसने खुद को एटीएस अधिकारी बताया. उसने पहले संजय को डराया-धमकाया और फिर उनकी पत्नी रोशी सक्सेना का आधार नंबर बताकर उन्हें भरोसे में ले लिया. इसके बाद ठगों ने दावा किया कि रोशी के दस्तावेज आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहे हैं.
ठगों ने बंद कराए घर के गेट
इसके बाद कॉल को कथित रूप से ‘पुणे मुख्यालय’ ट्रांसफर कर दिया गया, जहां स्क्रीन पर कई अन्य नकली अधिकारी नजर आए. सभी ने मिलकर दंपती को बुरी तरह डरा दिया. उनसे घर के अन्य सदस्यों के बारे में पूछा गया, जिस पर उन्होंने अपने बेटे तन्मय के बारे में बताया. ठगों ने तुरंत आदेश दिया कि घर का दरवाजा बंद कर लिया जाए और जांच पूरी होने तक कोई बाहर न जाए. इस तरह पूरा परिवार उनके नियंत्रण में आ गया.
डरा-धमकाकर ली संवेदनशील जानकारियां
ठगों ने संजय से बैंक खाते, आधार कार्ड, पैन कार्ड समेत कई संवेदनशील जानकारियां हासिल कर लीं. यहां तक कि उन्होंने एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट भी भेजा, जिसमें रोशी सक्सेना पर आतंकवादियों से संपर्क और देश की गोपनीय जानकारी लीक करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे. वारंट में बीएनएस की धाराओं का जिक्र होने से परिवार पूरी तरह सहम गया. इस दौरान तन्मय पर ठगों का ध्यान कम था.
तन्मय पहले से ही अखबार और सोशल मीडिया के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे फ्रॉड के बारे में जानता था. उसने इशारों में अपने पिता को सतर्क किया और हिम्मत बंधाई. बहाना बनाकर कॉल को बीच-बीच में कट कराया गया और ठगों द्वारा डाउनलोड कराए गए कुछ एप भी डिलीट कर दिए गए. जब ठग लगातार दबाव बनाते रहे, तो तन्मय किसी तरह बाहर निकला और पड़ोसी को पूरी बात बताई.
पुलिस ने तुरंत सीज कराया खाता
पड़ोसी ने तुरंत पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही प्रेमनगर पुलिस और साइबर सेल की टीम हरकत में आई और महज 10 मिनट के भीतर संजय का बैंक खाता फ्रीज कर दिया. इससे खाते में मौजूद करीब 6 लाख रुपये ठगी होने से बच गए. एसपी सिटी ने मौके पर पहुंचकर परिवार को समझाया और तन्मय की जमकर सराहना की. वहीं एसएसपी अनुराग आर्य ने साइबर टीम को 10 हजार रुपये का इनाम देकर सम्मानित किया है.
पुलिस ने किया लोगों को जागरूक
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं होता. यदि कोई वीडियो कॉल पर खुद को अधिकारी बताकर डराए-धमकाए, तो तुरंत कॉल काट दें और किसी भी हाल में अपनी निजी जानकारी साझा न करें. किसी भी संदिग्ध स्थिति में 112 और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत सूचना दें. इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जागरूकता और समझदारी से बड़ी से बड़ी ठगी को रोका जा सकता है.
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