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सपा सांसद के भगवान राम पर बयान से मचा विवाद, राजनीतिक और धार्मिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया



लखनऊ। Maltimedia news। समाजवादी पार्टी (सपा) के एक सांसद द्वारा भगवान श्रीराम को लेकर दिए गए बयान ने राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में विवाद खड़ा कर दिया है। बयान सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है, वहीं सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं।

क्या है पूरा मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सपा सांसद ने एक कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीराम को “समाजवादी विचारधारा से जुड़ा हुआ” बताते हुए कहा कि वनवास के समय भगवान राम ने समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों से सहयोग लिया था, इसलिए उन्हें समाजवादी कहा जा सकता है। सांसद के इस बयान को कई लोगों ने भगवान राम को आधुनिक राजनीतिक विचारधारा से जोड़ने का प्रयास बताया।

बयान पर क्यों भड़का विवाद

भगवान श्रीराम को हिंदू धर्म में मर्यादा पुरुषोत्तम, आदर्श राजा और धर्म के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। ऐसे में उन्हें किसी राजनीतिक विचारधारा से जोड़ना कई लोगों को धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ लगा। आलोचकों का कहना है कि धार्मिक आस्थाओं को राजनीतिक संदर्भ में इस्तेमाल करना अनुचित है।

विपक्ष का हमला

इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समेत अन्य दलों ने सपा पर निशाना साधा। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सपा जानबूझकर धार्मिक विषयों पर विवादित बयान देकर समाज को बांटने का काम कर रही है। कुछ नेताओं ने सांसद से माफी की मांग भी की है।

सपा का पक्ष

विवाद बढ़ने के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से यह कहा गया कि बयान को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। पार्टी समर्थकों का तर्क है कि सांसद का उद्देश्य भगवान राम के जीवन से सामाजिक समरसता और समानता का संदेश देना था, न कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ

यह मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया। कुछ लोग सांसद के बयान का समर्थन करते दिखे, जबकि बड़ी संख्या में यूजर्स ने इसे आस्था के खिलाफ बताया। ट्विटर, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर इस बयान को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है।

निष्कर्ष

भगवान राम जैसे आस्था के केंद्र में रहने वाले धार्मिक व्यक्तित्व पर दिया गया कोई भी राजनीतिक बयान स्वाभाविक रूप से संवेदनशील हो जाता है। सपा सांसद का यह बयान भी उसी वजह से विवादों में घिर गया है। अब देखना यह होगा कि पार्टी इस मुद्दे को कैसे संभालती है और क्या सांसद की ओर से कोई स्पष्टीकरण या माफी सामने आती है।

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