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ग्वालियर में चार फर्जी पुलिसकर्मी गिरफ्तार: ठगी व वसूली की तैयारी का बड़ा खुलासा



ग्वालियर, मध्य प्रदेश – ग्वालियर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े फर्जी पुलिस गैंग का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो पुलिस की वर्दी पहन कर रास्तों पर वाहनों से वसूली करने और बेरोजगार युवकों को नौकरी का झांसा देकर ठगी करने की योजना बना रहे थे। 


आरोपी कौन हैं और कैसे पकड़े गए

पुलिस की पूछताछ और समाचार रिपोर्टों के अनुसार:

  • गिरफ़्तार किए गए आरोपियों के नाम हैं
     • शिवम चतुर्वेदी (स्वयं को TI बताता था)
     • पवन यादव 
     • नीरज यादव 
     • रविंद्र यादव (ड्राइवर) 

  • सभी आरोपी मूलतः सागर जिले से हैं और लगभग दो महीने पहले ग्वालियर आए थे। 

  • शिवम ने खुद को टीआई (थाना निरीक्षक / उप-निरीक्षक) बताकर, पवन व नीरज को कॉन्स्टेबल का चरित्र रच दिया और रविंद्र को ड्राइवर की भूमिका दी। 

  • आरोपियों के पास से नकली नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र, फर्जी वर्दियाँ, सायरन, लाल बत्ती वाली स्कॉर्पियो वाहन आदि सामग्री बरामद हुई हैं। 


कैसे हुआ खुलासा

खबरों के अनुसार, खुलासे की शुरुआत एक ऑनलाइन स्टोर संचालक वैभव पाल की शिकायत से हुई। वैभव ने बताया कि शिवम नामक व्यक्ति ने उसे धमकी दी और फर्जी नियुक्ति पत्र बनवाने को कहा। 

जब शिवम और उसके साथी नियुक्ति पत्र लेने गढ़ाकोटा/मेट्रो टॉवर अपार्टमेंट इलाके में पहुंचे, तो क्राइम ब्रांच की टीम ने उन्हें दबोच लिया। 

एसएसपी धर्मवीर सिंह ने कहा है कि मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इस गैंग ने पहले भी ऐसी वारदातें की हैं या नहीं।


आरोपी कैसे लोगों को ठगा करते थे

पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ और मीडिया रिपोर्टों में सामने आया है:

  • यह गैंग बेरोजगार युवकों को पुलिस नौकरी लगाने का झांसा देता था और इसके नाम पर पैसे वसूलता था।

  • इसके अलावा, वे हाईवे पर नकली “चेकिंग” लगाकर वाहनों से वसूली करने की योजना बना रहे थे। 

  • अब तक अनुमान है कि उन्होंने 20 से अधिक लोगों से ₹25 लाख से ज़्यादा की ठगी की होगी।


पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच

  • आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में भेजा गया है। 

  • उनकी रिमांड अवधि खत्म होते ही उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। 

  • पुलिस ने कहा है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच होगी—उनके नेटवर्क, ठगी के अन्य शिकारों के आंकड़े और यह पता करना कि कहीं उन्हें कोई सरपरस्त या हाथ नहीं था। 

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