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'महिलाओं को स्तन ढकने का अधिकार टीपू सुल्तान ने दिया था...',अखिलेश यादव के करीबी तूफानी सरोज के विवादित बयान पर हुआ बवाल, तो सपा ने झाड़ा पल्ला


UP: 
समाजवादी पार्टी के नेता तूफानी सरोज के हालिया विवादित बयान ने देश की राजनीति में घमासान मचा दिया है। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं को स्तन ढकने का अधिकार टीपू सुल्तान ने दिया था, जिससे भारी आलोचना शुरू हो गई।

दरअसल, 30 मार्च यानी गुरुवार को यूपी विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाया गया था, जिसमें महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक पर चर्चा की गई। इस दौरान विधानमंडल में गरमागरमी देखने को मिली।

'स्तन ढकने का अधिकार टीपू सुल्तान ने दिया'

अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले तूफानी सरोज ने कहा कि टीपू सुल्तान के पहले स्तन नहीं ढकने का कानून था। उन्होंने दावा किया कि टीपू सुल्तान ने ही महिलाओं को स्तन ढकने का अधिकार दिया था। उनके इस बयान के बाद हंगामा मच गया।

'महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर सपा का मुकाबला नहीं'

इसके बावजूद उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए बीजेपी पर हमला बोला और कहा कि महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी का बीजेपी से कोई मुकाबला नहीं है। उन्होंने कहा कि आज से नहीं, आदिकाल से देख लीजिए। उन्होंने महिला आरक्षण पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वे महिला आरक्षण के विरोधी नहीं हैं और न कभी रहेंगे। साथ ही उन्होंने बीजेपी की महिला सशक्तिकरण की अवधारणा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या महिलाओं को राशन की कतार में खड़ा करके सशक्त बनाना चाहते हैं या शिक्षा और नौकरी देकर सशक्त बनाना चाहते हैं?

BJP ने समाजवादी पार्टी को घेरा

वहीं महिलाओं के खिलाफ विवादित बयान देकर तूफानी सरोज भाजपा के निशाने पर आ गए। बीजेपी प्रवक्ता हीरो वाजपेई ने कहा कि ये सपा का चरित्र है। अखिलेश यादव के घर का नाम टीपू ही है। आने वाले दिनों में 2027 के चुनाव में जमानत जब्त हो जाएगी और मुंह छुपाने का अधिकार भी टीपू सुल्तान ही देंगे।

विवाद बढ़ने पर सपा ने झाड़ा पल्ला

इस बयान पर जब विवाद बढ़ा तो समाजवादी पार्टी ने अपने हाथ झाड़ लिए और इस बयान से दूरी बना ली। सरोज ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी का बीजेपी से कोई मुकाबला नहीं है। उन्होंने कहा कि आज से नहीं, आदिकाल से देख लीजिए। उन्होंने महिला आरक्षण पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वे महिला आरक्षण के विरोधी नहीं हैं और न कभी रहेंगे। साथ ही उन्होंने बीजेपी की महिला सशक्तिकरण की अवधारणा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या महिलाओं को राशन की कतार में खड़ा करके, या शिक्षा व नौकरी देकर सशक्त बनाना चाहते हैं?

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