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RBI MPC Meeting: फिलहाल नहीं घटेगी आपके लोन की EMI, RBI ने रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव


भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आज, 8 अप्रैल बुधवार को वित्त वर्ष 2027 की अपनी पहली मॉनेटरी पॉलिसी () के नतीजों का ऐलान कर दिया है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच RBI के लिए ये फैसला लेना काफी चुनौतीपूर्ण था।

रिजर्व बैंक (RBI) आज, 8 अप्रैल बुधवार को वित्त वर्ष 2027 की अपनी पहली मॉनेटरी पॉलिसी () के नतीजों का ऐलान कर दिया है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच RBI के लिए ये फैसला लेना काफी चुनौतीपूर्ण था।

न्यूट्रल है स्टांस

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लगातार दूसरी बार रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है और ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है। इससे पहले, दिसंबर 2025 में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 0.25% की कटौती की थी, जो उस समय की बढ़ती महंगाई के बीच एक बड़ा कदम था। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने ब्याज दरों में कोई बदलाव न करते हुए रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक के नतीजों की जानकारी देते हुए बताया कि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट को 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट को 5.5% पर बरकरार रखा गया है। इसके साथ ही, केंद्रीय बैंक ने अपना रुख (Stance) भी 'न्यूट्रल' बनाए रखा है। इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि फिलहाल आम जनता के लोन और मासिक किस्त (EMI) में कोई बदलाव नहीं होगा।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर के अनुसार, देश की अर्थव्यवस्था में मजबूती का रुख लगातार बना हुआ है। फरवरी 2026 तक के ताजा आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों में अच्छी तेजी जारी है। इस ग्रोथ को मुख्य रूप से निजी खपत (प्राइवेट कंजम्पशन) और निवेश की बढ़ती मांग से बड़ा सहारा मिल रहा है।

हालांकि, आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने आगाह भी किया है कि वैश्विक तनाव (Global Tension) की अनिश्चितता और इसकी तीव्रता अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है। ऊर्जा संसाधनों और इंफ्रास्ट्रक्चर को होने वाला कोई भी संभावित नुकसान न केवल महंगाई बढ़ा सकता है, बल्कि देश की आर्थिक ग्रोथ के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है।

महंगाई बढ़ेगी, GDP का अनुमान घटा

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जानकारी दी है कि नई सीरीज के अनुसार पिछले साल की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.6% रहने का अनुमान है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा है, जिससे इस साल की विकास दर प्रभावित हो सकती है। राहत की बात यह है कि सरकार ने इनपुट सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही सक्रिय कदम उठाए हैं, जिससे व्यापारिक उम्मीदें अब भी उत्साहजनक बनी हुई हैं।

दूसरी ओर, गवर्नर ने 'इंपोर्टेड महंगाई' (Imported Inflation) को लेकर भी चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात को महंगा कर सकती हैं, जिसका सीधा असर व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे पर पड़ेगा। साथ ही, वैश्विक विकास दर में सुस्ती की संभावनाओं के कारण विदेशी मांग और विदेशी धन के प्रवाह (Remittances) में कमी आ सकती है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी।

रेपो रेट में 1.25% की भारी कटौती

अगर साल 2025 के पूरे आंकड़ों पर नजर डालें, तो आरबीआई ने कुल मिलाकर रेपो रेट में 1.25% की भारी कटौती की थी। इस कटौती के सिलसिले से पहले रेपो रेट 6.50% के उच्च स्तर पर था। गौरतलब है कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के पदभार संभालने के बाद फरवरी 2025 में पहली बार ब्याज दरों में कमी देखी गई थी। जानकारों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हाल ही में घोषित दो सप्ताह के सीजफायर के बीच, आरबीआई आने वाली कुछ और नीतिगत बैठकों में भी ब्याज दरों पर 'पॉज' बटन दबाए रख सकता है।

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