शिमला: हरियाणा के शिमला से बड़ी खबर सामने आ रही है. पिछले चुनावों में क्रॉस वोटिंग और गलत मतदान के कारण झटका झेल चुकी कांग्रेस इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती. इसलिए यहां राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है. पार्टी ने अपने 31 विधायकों को पुलिस एस्कॉर्ट के साथ शिमला पहुंचा दिया है. सभी विधायक शुक्रवार देर शाम करीब पौने 9 बजे शिमला के कुफरी स्थित एक निजी होटल में पहुंचे, जहां उनके लिए पहले से ही कमरे बुक कर दिए गए थे. यहां विधायकों की सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और बाहरी लोगों के प्रवेश पर भी सख्ती बरती जा रही है. हालांकि, आज हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह विधायकों से मिलने पहुंचे हैं.
पुलिस एस्कॉर्ट के साथ पहुंचाए गए विधायक
हिमाचल प्रदेश की सीमा में प्रवेश करते ही विधायकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सोलन पुलिस ने संभाली. इसके बाद शिमला पहुंचने तक उन्हें पुलिस सुरक्षा में लाया गया और आगे की सुरक्षा शिमला पुलिस को सौंप दी गई. विधायकों को दो पुलिस एस्कॉर्ट और दो पुलिस पायलट वाहनों की निगरानी में शिमला लाया गया. इसके लिए तीन टेंपो ट्रेवलर (अर्बेनिया) और पांच वीआईपी गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया. कुफरी पहुंचने के बाद पुलिस ने होटल रेडिसन के आसपास सुरक्षा घेरा बना लिया और किसी को भी विधायकों के करीब जाने की अनुमति नहीं दी गई. मीडिया को भी विधायकों से बातचीत करने की इजाजत नहीं दी गई.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी मौजूद
विधायकों के साथ हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और रोहतक से सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी मौजूद बताए जा रहे हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार विधायकों के संपर्क में हैं और चुनाव से जुड़ी रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं.
कब होगा राज्यसभा चुनाव?
जानकारी के अनुसार, हरियाणा में राज्यसभा चुनाव 16 मार्च को होना है. ऐसे में कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को एक साथ शिमला में ठहराया है ताकि किसी तरह की राजनीतिक हलचल या दबाव से उन्हें दूर रखा जा सके. चुनाव वाले दिन सभी विधायक सीधे चंडीगढ़ पहुंचकर मतदान करेंगे.
सतर्क हुई कांग्रेस
कांग्रेस इस बार क्रॉस वोटिंग की आशंका को लेकर बेहद सतर्क नजर आ रही है. दरअसल, पिछले दो राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी, जिसके कारण भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई थी. इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार पार्टी ने पहले से ही रणनीति बनाते हुए विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखने का फैसला किया है.
इन उम्मीदवारों के बीच मुकाबला
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने अपने प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा है. ऐसे में चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है और सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हुए हैं.
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