आज के डिजिटल दौर में हम हर छोटी-बड़ी चीज ऑनलाइन मंगवाने के आदी हो चुके हैं. कपड़े, मोबाइल, गैजेट्स से लेकर रोजमर्रा का सामान- सब कुछ एक क्लिक में घर पहुंच जाता है.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिन वेबसाइट्स पर आप भरोसा करते हैं, वहां कुछ ऐसा भी बिक सकता है जो कानून के खिलाफ हो? हाल ही में सामने आया एक मामला इसी भरोसे पर सवाल खड़ा करता है, जिसमें अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर गैरकानूनी वॉकी-टॉकी की बिक्री का खुलासा हुआ है.
कैसे सामने आया पूरा मामला
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने खुद संज्ञान लेते हुए इस मामले की जांच शुरू की. जांच में पाया गया कि कई ई-कॉमर्स वेबसाइट्स बिना किसी जरूरी लाइसेंस और अनुमति के वॉकी-टॉकी यानी पर्सनल मोबाइल रेडियो डिवाइस बेच रही थीं. हैरानी की बात यह रही कि करीब 16,970 ऐसे प्रोडक्ट्स की लिस्टिंग की गई थी, जो तय सरकारी नियमों का साफ तौर पर उल्लंघन कर रहे थे.
कंपनियों पर लगा भारी जुर्माना
इस गंभीर लापरवाही पर सीसीपीए ने सख्त रुख अपनाते हुए कुल 8 कंपनियों पर 44 लाख रुपये का जुर्माना लगाया. अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो और मेटा (फेसबुक मार्केटप्लेस) पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना ठोका गया. वहीं जियोमार्ट, चिमिया, टॉक प्रो और मास्कमैन टॉयज पर 1-1 लाख रुपये का दंड लगाया गया है.
उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि इन प्लेटफॉर्म्स ने न सिर्फ नियमों की अनदेखी की, बल्कि भ्रामक जानकारी देकर उपभोक्ताओं के अधिकारों का भी हनन किया. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ कंपनियों ने जुर्माना भर दिया है, जबकि कुछ से अभी भुगतान का इंतजार है.
क्या कहता है भारत का कानून
भारत में बिना लाइसेंस सिर्फ वही वॉकी-टॉकी इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जो 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी पर काम करते हों. इसके अलावा हर डिवाइस के पास ETA (Equipment Type Approval) सर्टिफिकेट होना जरूरी है. लेकिन जांच में पाया गया कि ऑनलाइन बिक रहे ज्यादातर डिवाइस इस तय सीमा से बाहर की फ्रीक्वेंसी पर काम कर रहे थे और उनके पास जरूरी प्रमाणपत्र भी नहीं था.
'हम सिर्फ बिचौलिये हैं' की दलील खारिज
जब कंपनियों से जवाब मांगा गया तो कुछ प्लेटफॉर्म्स ने खुद को सिर्फ एक इंटरमीडियरी बताते हुए जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की. उनका कहना था कि प्रोडक्ट्स थर्ड पार्टी सेलर्स बेचते हैं. लेकिन CCPA ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया और साफ कहा कि जो प्लेटफॉर्म ऐसे प्रोडक्ट्स को प्रमोट करता है, वह अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता.
क्यों गंभीर है यह मामला
यह सिर्फ नियम तोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा है. अनधिकृत रेडियो डिवाइस पुलिस, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं के संचार नेटवर्क में दखल दे सकते हैं. इससे सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को सीधा खतरा हो सकता है.
सरकार का अगला कदम
भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सरकार ने रेडियो उपकरण बिक्री नियमावली 2025 जारी की है. अब ई-कॉमर्स कंपनियों को खुद ऑडिट करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी वेबसाइट पर बिकने वाला हर वॉकी-टॉकी सभी सरकारी नियमों और फ्रीक्वेंसी मानकों पर खरा उतरता हो.
इस पूरे मामले से एक बात साफ है- ऑनलाइन शॉपिंग करते समय सिर्फ कीमत या ऑफर देखकर भरोसा करना सही नहीं. किसी भी इलेक्ट्रॉनिक या रेडियो डिवाइस को खरीदने से पहले उसके कानूनी मानकों और सर्टिफिकेट की जानकारी जरूर लें, ताकि बाद में लेने के देने न पड़ जाएं.
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