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IPS पूरण कुमार खुदकुशी केस कानूनी जंग में बदला । कोर्ट ने पूरण कुमार के परिवार को थमाया नोटिस।



चंडीगढ़: Haryana IPS Puran Kumar Case: हरियाणा के IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की कथित खुदकुशी मामले में अब गतिरोध और बढ़ गया है। अब ये मामला कोर्ट की दहलीज तक जा पहुंचा है। पोस्टमार्टम पर मची खींचतान के बीच चंडीगढ़ पुलिस ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है और आरोप लगाया है कि देरी की वजह से सबूत कमजोर हो रहे हैं। चंडीगढ़ पुलिस की अर्जी पर कोर्ट ने दिवंगत अधिकारी पूरन के परिवार को नोटिस जारी किया है।

चंडीगढ़ पुलिस ने जिला अदालत में दायर अर्जी में दिवंगत दलित IPS अधिकारी के शव का पोस्टमार्टम कराने की इजाजत मांगी है। कोर्ट इस मामले पर कल सुनवाई करेगा। बता दें कि कथित खुदकुशी के आठवें दिन भी न तो पोस्टमार्टम हो सका है और न ही उनका अंतिम संस्कार हो सका है। फिलहाल उनका शव चंडीगढ़ के PGIMER के एडवांस ऑटोप्सी सेंटर में रखा गया है।

IAS पत्नी अमनीत पी कुमार को एक अनुरोध पत्र भेजा था
अदालत पहुंचने से पहले चंडीगढ़ पुलिस ने दिवंगत IPS अफसर की IAS पत्नी अमनीत पी कुमार को एक अनुरोध पत्र भेजा था और उनसे आग्रह किया थाा कि वह शीघ्र पीएमई (पोस्टमॉर्टम) के लिए शव की पहचान के वास्ते आगे आएं, क्योंकि यह जांच के लिए आवश्यक है लेकिन अमनीत कौर ने इस मामले पर चुप्पी साधे रखी और राज्य सरकार पर दबाब बनाया कि जब तक मामले में आरोपी वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हो जाती वह पोस्टमार्टम करने की इजाजत नहीं देंगी। इसके बाद मामले में मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शत्रुजीत कपूर को लंबे अवकाश पर भेज दिया।

ASI ने खुदकुशी कर मामले में लाया ट्विस्ट
दूसरी तरफ, इस मामले ने तब नाटकीय मोड़ ले लिया, जब दिवंगत IPS के गनमैन के खिलाफ लगे वसूली के आरोपों की जांच कर रहे एक ASI ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली और सुसाइड नोट में पूरन कुमार पर भ्रष्ट होने के आरोप लगाए। संदीप कुमार लाठर नाम के इस ASI ने एक वीडियो क्लिप भी रिकॉर्ड किया है, जिसमें पूरन दंपत्ति के खिलाफ कई आरोप लगाए गए हैं।

7 अक्टूबर को पूरन ने की थी खुदकुशी
बता दें कि 2001 बैच के IPS अधिकारी, 52 वर्षीय पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर 11 में अपने आवास पर कथित तौर पर खुद को गोली मार ली थी। कुमार ने मौत से पहले कथित तौर पर लिखे आठ पन्नों के ‘अंतिम नोट’ में, हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक के पूर्व पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारणिया समेत आठ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों पर कथित तौर पर उन्हें परेशान करने और उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया है। उन्होंने नोट में कुछ अन्य अधिकारियों द्वारा जाति-आधारित भेदभाव समेत कथित उत्पीड़न का भी विवरण दिया है। राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए चंडीगढ़ आईजी के नेतृत्व में एक SIT का भी गठन किया है।

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