5 मिनट की अज़ान से लोगों की नींद उड़ जाती है। यदि मस्जिद में 10 मिनट की नमाज के लिए स्थान नहीं है तथा कोई बाहर नमाज पढ़ रहा है तो आपको कठिनाई है; किंतु कावड़ यात्रा के रास्ते पूरे एक महीने तक बंद रहते हैं, क्या आपको इससे बाधा नहीं है?
मौलाना रजा ने आगे कहा कि कावड़ यात्रियों की सुविधा के लिए जो भी करना हो किया जाना चाहिये। हमें इससे कोई समस्या नहीं है; लेकिन हम पर लगाए गए प्रतिबंधों से असुविधा है।' हमें उस पर आपत्ति है। मुहर्रम की शोभायात्रा हमेशा एक निश्चित स्थान से ही चलती है। कभी नये रास्ते पर नहीं चलती। हम नई परंपराएँ नहीं बना रहे हैं; लेकिन आप लोग ऐसा करते है। आप वही करें जो आपका धर्म आपको करने की अनुमति देता है; लेकिन हम पर प्रतिबंध लगाना अन्याय है।
मौलाना तौकीर रजा ने आगे कहा कि मुसलमानों को अपनी दुकानों और घरों पर अपने नाम का बोर्ड लगाना चाहिए। जो ऐसा नहीं करते, वे या तो धोखा देने की ईक्षा रखते हैं या इससे भ्यभीत हैं। अपनी पहचान छुपाकर व्ययसाय करना उचित नहीं है। यदि आप साफ-सफाई रखते हैं और अच्छा व्यवसाय चलाते हैं, तो लोग आपसे खरीदारी करेंगे। जो लोग अपनी पहचान छिपाते हैं वे निर्बल होते हैं।
रजा ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने मुसलमानों को कष्ट देने की मंशा से यह आदेश जारी किया था, जिस पर न्यायालय ने रोक लगा दी है। मुसलमानों को अपनी पहचान क्यों छिपानी चाहिए? इस पर विचार किया जाना चाहिए। वास्तव में, वे अपनी असली पहचान खोते जा रहे हैं। उन्हें इतनी स्वतंत्रता मिल गई है कि वे दाढ़ी या टोपी नहीं पहनते हैं और उनकी जीवन शैली भी बदल गई है। कोर्ट ने स्वैच्छिक नाम लिखने की अनुमति दे दी है, मेरा मानना है कि हर दुकानदार को अपनी नाम पट्टी लगानी चाहिए। एक मुस्लिम के रूप में अपनी पहचान उजागर करें। मुसलमान होने पर गर्वित अनुभव करना चाहिए।
संपादकीय भूमिका
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90% लोग ये नहीं जानते…
कुछ खबरें बाद में हटा दी जाती हैं 😳
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