नेपाल की राजधानी काठमांडू में अवैध बस्तियों पर चलाए जा रहे बुलडोजर अभियान के बीच 11 साल की एक बच्ची की भावुक चिट्ठी ने हजारों बेघर परिवारों की पीड़ा को सामने ला दिया है।
बच्ची ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को चिट्ठी लिखकर पूछा है कि जब उसके परिवार ने चुनाव में उनकी पार्टी को वोट दिया था, तो फिर उनका घर क्यों तोड़ दिया गया। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली राधिका महतो ने अपनी चिट्ठी में लिखा, 'हमारे परिवार ने 5 मार्च के चुनाव में आपकी पार्टी और 'घंटी' चुनाव चिन्ह को वोट दिया था। फिर आपने हमारा घर क्यों तोड़ दिया? अब हम कहां रहेंगे और पढ़ाई कैसे करेंगे?'
'आपने हमारी हालत और खराब कर दी है'
ऑनलाइन न्यूज पोर्टल 'रतोपाटी' ने बुधवार को इस भावुक पत्र के कुछ हिस्से प्रकाशित किए। राधिका ने आगे लिखा, 'हमारे पास किराए का घर लेने के पैसे नहीं हैं। आपने हमारी हालत और खराब कर दी है।' बता दें कि करीब 3 हफ्ते पहले तक राधिका काठमांडू के थापाथली इलाके की झुग्गी बस्ती के पास स्थित गुहेश्वरी बाल शिक्षा सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई कर रही थी। उसका परिवार वहीं एक अस्थायी झोपड़ी में रहता था। लेकिन प्रशासन ने इलाके में बनी सैकड़ों झुग्गियों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें हटा दिया। इसके बाद विस्थापित परिवारों को काठमांडू से करीब 75 किलोमीटर दूर बनेपा नगरपालिका के एक अस्थायी शिविर में भेज दिया गया।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह।
'हमारे लिए स्कूल की व्यवस्था कीजिए'
घर उजड़ने के साथ ही राधिका की पढ़ाई भी रुक गई। उसने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए लिखा, 'हमें पढ़ने के लिए स्कूल चाहिए। रहने के लिए जगह और पढ़ाई जारी रखने के लिए स्कूल की व्यवस्था कीजिए।' पिछले 2 हफ्तों में सरकार ने काठमांडू में 15 हजार से ज्यादा भूमिहीन लोगों को हटाया है। इस दौरान करीब 4 हजार अस्थायी मकानों और ढांचों को तोड़ा गया। सरकार का कहना है कि ये बस्तियां सरकारी जमीन और नदी किनारे अवैध रूप से बनाई गई थीं। हालांकि इस कार्रवाई के बाद सरकार की काफी आलोचना हो रही है।
बालेन शाह के आदेश का जबरदस्त विरोध
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार बिना पुनर्वास की व्यवस्था किए गरीब और कमजोर परिवारों को बेघर कर रही है। यह मामला नेपाल के सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया है। अदालत ने शुक्रवार को अंतरिम आदेश जारी करते हुए सरकार से कहा कि उचित पुनर्वास योजना के बिना झुग्गीवासियों को न हटाया जाए। जस्टिस कुमार रेग्मी और नित्यानंद पांडे की संयुक्त पीठ ने कहा कि किसी भी विस्थापन की प्रक्रिया कानून के अनुसार होनी चाहिए और इसमें लोगों के आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवैधानिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है।
बालेन सरकार ने बचाव में दी ये दलील
अदालत ने चेतावनी दी कि बिना सुरक्षा और पुनर्वास के इस तरह की कार्रवाई मानवीय संकट पैदा कर सकती है। वहीं, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने बुलडोजर अभियान का बचाव करते हुए कहा है कि सरकारी जमीन को खाली कराना और शहरी ढांचे को बेहतर बनाना जरूरी है। इस अभियान को लेकर नाराजगी अब काठमांडू से बाहर भी फैलने लगी है। समाचार पोर्टल 'नेपालप्रेस डॉट कॉम' के मुताबिक, पोखरा में सैकड़ों भूमिहीन लोगों ने मशाल जुलूस निकालकर प्रधानमंत्री बालेन शाह के इस्तीफे की मांग की।
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