स्ट्रेट ऑफ हार्मूज पर अमेरिका को उस समय बड़ा झटका लगा जब जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देशों ने उसका साथ देने से इनकार कर दिया। दोनों ही देशों ने साफ कर दिया कि उनका स्ट्रेट ऑफ हार्मूज में सेना भेजने का कोई प्लान नहीं है। नाटो देश भी इस बार अमेरिका के साथ नहीं दिखाई दे रहे हैं।
तेल कंपनियों का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ हार्मूज से जहाजों की निकासी बंद होने से दुनियाभर में तेल संकट गहरा रहा है। जल्द ही इसका हल नहीं निकला तो समस्या और गंभीर हो सकती है। इधर भारत ने ईरान से बातकर अपने 2 जहाजों को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया है।
अमेरिका हर हाल में हार्मूज को खुलवाना चाहता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के सात सहयोगी देशों ने होर्मुज में मदद के लिए अपनी नौसेना भेजने की अपील की थी। लेकिन अभी तक एक भी देश मदद के लिए सामने नहीं आए हैं।
ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि ट्रंप के अनुरोध के बाद भी वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौसेना का जहाज नहीं भेजेगा। जापान भी ट्रंप के अनुरोध को ठुकरा चुका है। जापान का कहना है कि वह समुद्री सुरक्षा अभियानों पर विचार नहीं कर रहा है।
ट्रंप ने इन देशों से की थी अपील
अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन समेत उन सभी देशों से स्ट्रेट ऑफ हार्मूज में युद्धपोत भेजने की अपील की थी जिनके जहाज यहां फंसे हुए हैं। उनका कहना था कि हमले ईरानी सेना की हमले की क्षमता 100 प्रतिशत खत्म कर दी है। लेकिन उनके लिए एक दो ड्रोन भेजना, माइन गिराना या कम दूरी का मिसाइल हमला आसान है।
ट्रंप की नाटो को चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाटो के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से फायदा लेने वाले देशों को इसकी सुरक्षा की भी जिम्मेदारी उठानी चाहिए। अगर कोई कुछ नहीं करता या मदद नहीं करता तो मुझे लगता है कि यह नाटो के भविष्य के लिए बहुत बुरा होगा।
गौरतलब है कि ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में बारूदी सुरंगों को साफ करने के लिए युद्धपोतों की तैनाती की मांग कर रहे हैं। बहरहाल ईरान पर हमले के बाद अमेरिका और इजराइल के समर्थन में कोई भी देश खुलकर सामने नहीं आया है।
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