तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच 'मध्यस्थ' बनने के लिए आतुर दिख रहे पाकिस्तान को लेकर तेहरान की त्योरियां चढ़ गई हैं। पाकिस्तान का दावा है कि उसने अमेरिका के संदेश को ईरान तक पहुंचाया है। पाकिस्तानी विश्लेषक कह रहे हैं कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान से युद्धविराम पर बातचीत के लिए इस्लामाबाद आ सकते हैं। हालांकि इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान पर दबाव है कि वह ईरान के साथ अमेरिका की जंग को बंद कराए नहीं तो उसे सऊदी अरब के साथ ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरना पड़ सकता है। पाकिस्तान खुद को पड़ोसी ईरान का भी करीबी दिखाने का ढोंग कर रहा है लेकिन दुनियाभर के केंद्र बने होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका की मदद का उसका ताजा कदम शिया देश को काफी नागवार गुजरा है। ईरान का मानना है कि पाकिस्तान डबल गेम खेल रहा है।
असल में पूरा मामला डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे से जुड़ा हुआ है जिसमें उन्होंने कहा कि 10 अमेरिकी जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने दिया जो इस बात का संकेत है कि तेहरान चाहता है कि कूटनीतिक चैनल खुले रहें। सीएनएन न्यूज 18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान अब पाकिस्तान की असली निष्ठा पर सवाल उठा रहा है। ईरान ने कुछ मित्र देशों को जिसमें चीन, भारत और पाकिस्तान शामिल हैं, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की सीमित अनुमति दी है। ईरान की इस अनुमति का इस्तेमाल पाकिस्तान ने अमेरिका को फायदा पहुंचाने के लिए किया।
खुफिया सूत्रों का कहना है कि इसके जरिए पाकिस्तान ने लक्ष्मण रेखा को पार कर दिया है। इस कदम के जरिए पाकिस्तान ने ईरान पर हमला करने वाले अमेरिका की मदद की है। ईरानी शासन के एक धड़े का मानना है कि मुस्लिम देश पाकिस्तान ने उसे धोखा दिया है। वह भी तब जब पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ के रूप में प्रोजेक्ट कर रहा है। पाकिस्तान ने अमेरिका की 15 सूत्री मांग को ईरान को सौंपा है और सीजफायर कराकर खुद को अगुआ बनाना चाहता है। ईरान ने खुलकर इन प्रयासों को या तो खारिज कर दिया है या उसे कम करके पेश किया है।
ईरान पाकिस्तान को एक मध्यस्थ नहीं, बल्कि एक सुविधा देने वाले के रूप में अधिक देखता है। साथ ही उससे वैसी ही भूमिका निभाने की अपेक्षा करता है जैसी ईरान और सऊदी अरब के बीच सुलह कराने में चीन ने निभाई थी। पाकिस्तानी किसी नतीजे को थोपे नहीं बल्कि सीधे संवाद के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करे।
खाड़ी देश राजनयिक सूत्र
उन्होंने कहा कि ईरान ने पाकिस्तानी कदम को अमेरिका के हितों से जोड़कर देख रहा है। खूफिया सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान का होर्मुज स्ट्रेट में कदम 'जानबूझकर धोखा देना' है। इसका उद्देश्य अमेरिका के लक्ष्यों को सहायता देना है। साथ ही ईरान तक अपनी पहुंच को बनाए रखना है। पाकिस्तान का मध्यस्थता का प्रयास केवल दिखावा है। इसके जरिए पाकिस्तान ईरान और अमेरिका दोनों का लाभ उठाना चाहता है। पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ पूरी तरह से मिला हुआ है जो ईरान का मुख्य प्रतिद्वंदी है। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच आपसी रक्षा समझौता है। सऊदी अरब की नजर पाकिस्तानी परमाणु छतरी पर है। सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान लगातार अमेरिका को ईरान पर हमले जारी रखने के लिए कह रहे हैं।
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