रिपोर्ट: Maltimedia News टीम | अंबाला
हरियाणा के अंबाला जिले के घनी खेड़ा गांव में एक प्रेरणादायक सामाजिक बदलाव देखने को मिला है। यहां अब घरों की नेमप्लेट (नामपट्ट) पर केवल पुरुष मुखिया का नाम नहीं, बल्कि बेटियों के नाम और उनकी शैक्षणिक योग्यताओं को भी प्रमुखता से लिखा जा रहा है। यह पहल न केवल महिलाओं के सम्मान की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि समाज में लैंगिक समानता का सकारात्मक संदेश भी दे रही है।
🔶 कैसे शुरू हुई पहल?
गांव के कुछ जागरूक परिवारों ने सबसे पहले अपने घरों के बाहर लगी नेमप्लेट पर बेटियों के नाम के साथ उनकी शिक्षा — जैसे बी.ए., एम.ए., बी.एड., इंजीनियरिंग या अन्य डिग्रियां — लिखवानी शुरू की। धीरे-धीरे यह पहल पूरे गांव में चर्चा का विषय बन गई और कई अन्य परिवार भी इससे प्रेरित होकर जुड़ते गए।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले घरों की पहचान केवल पुरुषों से होती थी, लेकिन अब बेटियों की उपलब्धियों को भी बराबर सम्मान दिया जा रहा है।
🔶 सामाजिक सोच में बदलाव
ग्रामीणों के अनुसार, इस कदम से दो बड़े बदलाव सामने आए हैं:
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बेटियों का मनोबल बढ़ा है – उन्हें परिवार और समाज से सम्मान मिल रहा है।
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शिक्षा को बढ़ावा – अन्य परिवार भी अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। घनी खेड़ा गांव ने इस विचार को जमीनी स्तर पर अपनाकर एक मिसाल पेश की है।
🔶 महिलाओं के सम्मान की नई पहचान
हरियाणा, जिसे कभी लिंगानुपात और बेटियों की स्थिति को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा था, उसी हरियाणा के इस गांव की यह पहल सोच में बदलाव का प्रतीक मानी जा रही है।
एक स्थानीय शिक्षक ने बताया कि “जब घर के बाहर बेटी का नाम और उसकी डिग्री लिखी होती है, तो समाज में उसका सम्मान अपने आप बढ़ जाता है। यह आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।”
🔶 राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा
इस अनोखी पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है। कई मीडिया प्लेटफॉर्म, जिनमें SheThePeople भी शामिल है, ने इस सामाजिक बदलाव को प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अन्य गांव और शहर भी इस तरह की पहल अपनाएं, तो महिलाओं की शिक्षा और सम्मान को नई दिशा मिल सकती है।
📌 निष्कर्ष
अंबाला का घनी खेड़ा गांव आज केवल एक भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की मिसाल बन चुका है। घरों की नेमप्लेट पर बेटियों के नाम और उनकी डिग्रियां लिखना एक छोटा कदम जरूर है, लेकिन इसका संदेश बहुत बड़ा है — “बेटियां भी परिवार की बराबर की पहचान हैं।”
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