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सोना और चांदी में भयंकर गिरावट। पूरा देश सहम गया, थर थर कांप रहे लोग।



रिकॉर्ड तेजी के बीच सर्राफा बाजार में शुक्रवार को कोहराम मच गया। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के ठीक अगले ही दिन चांदी की चमक फीकी पड़ गई और इसमें ₹20,000 प्रति किलोग्राम की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। मुनाफावसूली की आंधी और वैश्विक स्तर पर कमजोर संकेतों के चलते न केवल चांदी बल्कि सोने की कीमतों में भी भारी मुनाफावसूली देखी। गुरुवार को अपने सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने वाली चांदी शुक्रवार को औंधे मुंह गिरी।

एमसीएक्स पर एक ही दिन में मार्च डिलिवरी वाली चांदी 84000 (83,977 रुपये पर) रुपये के करीब फिसल गई। इसमें करीब 21% फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और भाव 3,15,916 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इस बीच, फरवरी डिलीवरी वाला सोना 15,246 रुपये यानी 9 फीसदी फिसलकर 1,54,157 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।

चांदी: रिकॉर्ड हाई से सीधा धड़ाम
दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 20,000 रुपये (करीब 5%) टूटकर 3,84,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई (सभी करों सहित)। गौरतलब है कि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी ने 19,500 रुपये की छलांग लगाई थी और 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर को छू लिया था।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। स्पॉट सिल्वर12.09% यानी 14 डॉलर टूटकर 101.47 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। इंट्रा-डे कारोबार में तो यह 17.5% गिरकर 95.26 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर तक पहुंच गई थी।

सोने का हाल: एक दिन में ₹14,000 की गिरावट
चांदी की तरह सोने में भी भारी बिकवाली का दबाव रहा। दिल्ली में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 14,000 रुपये (7.65%) गिरकर ₹1,69,000 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। गुरुवार को सोना ₹12,000 चढ़कर 1,83,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था।

बाजार विश्लेषकों ने सर्राफा बाजार में भारी गिरावट के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं-

1. आक्रामक मुनाफावसूली
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी ने बताया कि लगातार कई सत्रों की तेजी के बाद बड़े संस्थागत निवेशकों ने अपनी ‘लॉन्ग पोजीशन’ काटी हैं, जिससे बाजार में भारी बिकवाली आई।

2. अमेरिकी शटडाउन टला
कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी (कमोडिटी रिसर्च) कायनात चैनवाला के अनुसार, अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रम्प और सीनेट डेमोक्रेट्स के बीच सरकारी शटडाउन को टालने के लिए एक अस्थायी समझौता हो गया है। इस खबर ने सुरक्षित निवेश के रूप में बुलियन की मांग को कमजोर कर दिया।

3. फेड रिजर्व और डॉलर
इनक्रेड मनी के सीईओ विजय कप्पा का कहना है कि केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व का अगला प्रमुख नामित किए जाने से बाजार में अनिश्चितता है। निवेशकों को डर है कि नया नेतृत्व ब्याज दरों पर सख्त रुख अपना सकता है। इसके चलते डॉलर इंडेक्स और यूएस ट्रेजरी यील्ड में तेजी आई है, जो धातुओं के लिए नकारात्मक संकेत है। तकनीकी रूप से भी बाजार ‘ओवरबॉट’जोन में था, जिसके कारण मुनाफावसूली की आशंका थी।

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