100 साल से यात्रियों और राहगीरों की प्यास बुझा रहा है यह धरोहर
अंबाला | Maltimedia News
अंबाला छावनी में स्थित ऐतिहासिक किरची-मिर्ची प्याऊ जल्द ही अपने 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। यह प्याऊ केवल पानी पिलाने की जगह नहीं, बल्कि अंबाला की सामाजिक सेवा, संस्कृति और मानवता का जीवंत प्रतीक बन चुका है।
करीब एक सदी पहले स्थापित यह प्याऊ आज भी उसी सेवा भावना के साथ राहगीरों, सैनिकों, यात्रियों और स्थानीय लोगों की प्यास बुझा रहा है। भीषण गर्मी हो या ठंड का मौसम, यह प्याऊ हर समय आमजन के लिए खुला रहता है।
🔹 कैसे पड़ा नाम “किरची-मिर्ची प्याऊ”
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, इस प्याऊ का नाम उस दौर की एक लोककथा से जुड़ा है, जब यहाँ पानी के साथ सादा भोजन और मसाले भी यात्रियों को उपलब्ध कराए जाते थे। समय के साथ यह नाम लोगों की जुबान पर चढ़ गया और पहचान बन गया।
🔹 आज भी कायम है सेवा परंपरा
सबसे खास बात यह है कि इतने वर्षों बाद भी यह प्याऊ दान और सेवा के सहयोग से चल रहा है। स्थानीय समाजसेवी, व्यापारी और नागरिक इसकी देखरेख करते हैं।
यहाँ न कोई शुल्क लिया जाता है और न ही किसी से भेदभाव — हर कोई समान रूप से सेवा पाता है।
🔹 शताब्दी वर्ष पर आयोजन की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, शताब्दी वर्ष के अवसर पर
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विशेष धार्मिक आयोजन
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सेवा सम्मान समारोह
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ऐतिहासिक प्रदर्शनी
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और सांस्कृतिक कार्यक्रम
आयोजित किए जा सकते हैं, ताकि नई पीढ़ी को इस धरोहर के महत्व से अवगत कराया जा सके।
🔹 प्रशासन भी करेगा संरक्षण
अंबाला छावनी प्रशासन और स्थानीय निकाय इस ऐतिहासिक प्याऊ को संरक्षित धरोहर के रूप में विकसित करने की योजना पर विचार कर रहे हैं, जिससे इसकी मूल पहचान बनी रहे।
📌 किरची-मिर्ची प्याऊ आज भी यह संदेश देता है कि मानव सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है।
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