19 दिसंबर 2025 — पश्चिम बंगाल के तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक मदन मित्रा द्वारा भगवान श्रीराम को “मुसलमान” बताया जाने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देश में बड़े स्तर पर सियासी तथा सामाजिक विवाद भड़क गया है।
इस बयान को लेकर अयोध्या के संत समाज, हिंदू संगठनों, विपक्षी दलों और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, जिससे देशभर में बहस तेज हो गई है।
🔥 क्या कहा गया था बयान में?
विडियो में टीएमसी के विधायक मदन मित्रा एक जनसभा के दौरान बोलते दिखते हैं कि “भगवान राम मुसलमान थे, हिंदू नहीं”, और उन्होंने यह टिप्पणी बीजेपी के हिंदू धर्म की समझ पर सवाल उठाने के लिए की।
मित्रा ने यह भी कहा कि उन्होंने एक वरिष्ठ बीजेपी नेता को राम की धार्मिक पहचान को लेकर चुनौती दी थी और कहा कि “राम का सरनेम क्या है”, जिसके किसी ने स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। उनका तर्क था कि उनका बयान हिंदू धर्म पर हमला नहीं, बल्कि राजनीतिक आलोचना का हिस्सा था।
हालाँकि मदन मित्रा के समर्थकों ने दावा किया है कि वीडियो पुराना और एडिटेड हो सकता है, और उसे चुनावी माहौल से पहले फैलाया गया है।
😡 अयोध्या संत समाज और हिंदू संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया
अयोध्या के संत समाज ने इस बयान को सनातन धर्म और भगवान राम के प्रति अपमानजनक बताया है। संतों ने इसे धार्मिक भावनाओं पर हमला करार दिया और विधायक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि राम का जन्म हिंदू संस्कृति और इतिहास का अटूट हिस्सा हैं, और किसी को भी उनके बारे में ऐसा विवादित बयान देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे बयानों से संप्रदायिक तनाव फैल सकता है।
दूसरे संतों ने भी भाजपा सरकार से राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज करने तथा कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
🗳️ राजनीतिक और सोशल मीडिया रिएक्शन्स
🔹 भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मदन मित्रा के बयान की तीखी निंदा करते हुए कहा कि यह हिंदू धर्म का अपमान है और धर्मनिरपेक्षता को हानि पहुंचाने वाला है। पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बयान हिंदू-मुस्लिम भावनाओं को भड़काने वाला है।
🔹 सोशल मीडिया पर भी बवाल मचा हुआ है, जहाँ कई यूजर्स ने सख्त कार्रवाई की मांग की है। कुछ प्रतिक्रियाओं में बहुत कड़े शब्दों का उपयोग भी देखा गया है।
🔹 दूसरी ओर, TMC पार्टी ने खुद को इस बयान से दूरी बनाते हुए कहा कि वे रामायण और अयोध्या के प्रति सम्मान रखते हैं, और इस बयान का समर्थन नहीं करती।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे विपक्षी दलों ने उन पर दबाव बनाया है कि वे स्पष्ट स्थिति जाहिर करें।
🧭 विश्लेषण: विवाद क्या दर्शाता है?
विश्लेषक मानते हैं कि यह मामला राजनीतिक माहौल और अगले चुनावों से पहले फिर से चर्चित मुद्दों में से एक बन गया है। धार्मिक पहचान और संस्कृति से जुड़े बयान अक्सर सियासी तापमान को बढ़ा देते हैं, और इस घटना ने भी देश के कई हिस्सों में बहस और प्रतिक्रिया की लहर पैदा कर दी है।
🧵 निष्कर्ष
मदन मित्रा का विवादित बयान और उसका वायरल होना धार्मिक भावनाओं, राजनीति और सामाजिक परिस्थितियों के बीच जटिलता को दर्शाता है। संतों की तीखी प्रतिक्रिया, राजनीतिक दलों के बयान और सोशल मीडिया पर चल रही बहस से यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति के कथन से कहीं आगे बढ़ चुका है और अब व्यापक सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।
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