हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान वंदे मातरम पर जमकर बहस हुई. शुक्रवार को हुई बहस के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि भले ही यह परंपरा के अनुरूप नहीं है, लेकिन विषय की गंभीरता को देखते हुए चर्चा की शुरुआत से पहले बात रखना आवश्यक था.
हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम पर जमकर बहस हुई और इस बहस के दौरान बात हाथापाई तक आ गई. स्पीकर ने इस पर संज्ञान लेते हुए 10 कांग्रेस विधायकों को सदन से निकाल दिया. बता दें कि शुक्रवार को हुई बहस के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि भले ही यह परंपरा के अनुरूप नहीं है, लेकिन विषय की गंभीरता को देखते हुए चर्चा की शुरुआत से पहले बात रखना आवश्यक था.
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दिन पहले ही सदन में भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नेता प्रतिपक्ष के रूप में स्वागत किया गया था. अपने वक्तव्य के अंत में हुड्डा ने यह अपेक्षा जताई थी कि विपक्ष की आवाज को दबाया नहीं जाएगा, जिस पर सरकार ने तुरंत सहमति जताई थी. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भावपूर्ण संवाद से हरियाणा की जनता के मन में सदन के रचनात्मक भविष्य को लेकर सकारात्मक संदेश गया था, लेकिन अफसोस की बात है कि दो घंटे के भीतर ही विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लेकर आ गया.
अध्यक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार
मुख्यमंत्री ने अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षरों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस पर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के हस्ताक्षर नहीं थे. या तो उन्हें इस प्रस्ताव की जानकारी नहीं थी या फिर जानकारी होते हुए भी इसे आने दिया गया. उन्होंने कहा कि अध्यक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार किए जाने के बाद सरकार चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है.
वंदे मातरम पर सदन में हंगामा
सत्र के दौरान वंदे मातरम को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली. मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम एक पवित्र मंत्र है और इसे अन्य मुद्दों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी कहा कि वंदे मातरम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला की ओर से वंदे मातरम की पंक्तियों का संदर्भ देते हुए प्रदूषण और महिलाओं के मुद्दे उठाने पर सदन में हंगामा हो गया. कांग्रेस विधायक वेल में आ गए, जिसके बाद स्पीकर ने 10 कांग्रेस विधायकों को नामित कर सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए.
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह ऐतिहासिक तथ्य है कि जवाहरलाल नेहरू ने वंदे मातरम के विरोध में मुस्लिम लीग का साथ दिया था और इन तथ्यों को छुपाया नहीं जा सकता. वंदे मातरम पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मंत्र स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश को नई ऊर्जा देने वाला रहा है. वंदे मातरम को याद करना इस सदन के लिए सौभाग्य की बात है और यह सदन की राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
स्वतंत्रता की तपस्वी यात्रा का स्मरण
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होना हम सभी के लिए गर्व का विषय है. यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता की तपस्वी यात्रा का स्मरण है, जिसने करोड़ों भारतीयों के हृदय में बलिदान, त्याग और तपस्या की भावना जगाई. मुख्यमंत्री ने बताया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचित वंदे मातरम स्वदेशी आंदोलन की आत्मा बना और अंग्रेजी हुकूमत ने इसे खतरनाक राष्ट्रवादी तंत्र माना. 15 अगस्त 1947 को सरदार वल्लभभाई पटेल के आग्रह पर पंडित ओंकार नाथ ठाकुर ने आकाशवाणी से वंदे मातरम का गायन कर पूरे देश को भावुक किया.
उन्होंने यह भी कहा कि यदि वंदे मातरम की भावना न होती तो आज जनप्रतिनिधि इस सदन में नहीं बैठे होते. महिलाओं, युवाओं और किसानों ने इस मंत्र के साथ यातनाएं सहीं, जेल गए और फांसी तक चूमी. मुख्यमंत्री ने हरियाणा के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि 1857 की क्रांति में झज्जर, रोहतक और अंबाला के किसानों और सैनिकों ने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी. हरियाणा की मिट्टी केवल अन्न ही नहीं, वीरता भी पैदा करती है.
गीत नहीं, बल्कि जीवन मंत्र
उन्होंने कहा कि केंद्र और हरियाणा सरकार ने वंदे मातरम के गौरव गान को एक वर्ष तक मनाने का निर्णय लिया है, जिसका शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 नवंबर को किया. अपने वक्तव्य के अंत में मुख्यमंत्री ने सदन से आह्वान किया कि वंदे मातरम को केवल गीत नहीं, बल्कि जीवन मंत्र के रूप में अपनाया जाए और उसकी भावना को आचरण में उतारा जाए. उन्होंने इस ऐतिहासिक विषय पर विचार रखने का अवसर देने के लिए सदन का आभार व्यक्त किया.
इन विधायकों को स्पीकर ने सदन से किया बाहर
बता दें कि विधानसभा में चली इस तीखी बहस और हंगामे के बाद स्पीकर ने कांग्रेस विधायक इंदु नरवाल, शकुंतला खटक, विकास सहारन, कुलदीप वत्स, गीता भुक्कल, अशोक अरोड़ा, देवेन्द्र हंस, जस्सी पेटवाड़, नरेश सेलवाल और बलराम दांगी को नेम किया. स्पीकर ने कहा कि जिन विधायकों को नेम किया गया है, उन्हें सदन से बाहर जाना होगा. उन्हें स्वयं जाना होगा, अन्यथा मार्शल के माध्यम से बाहर किया जाएगा. जिन विधायकों को नेम नहीं किया गया है, वे अपनी सीट पर बैठ जाएं.
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