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नरसिंहपुरा में बच्चे को फीस न जमा करने के कारण परीक्षा नहीं देने का विवादित मामला


नरसिंहपुरा: आज (१४ दिसंबर २०२५) स्थानीय समुदाय में एक विवादित मामला सामने आया है जिसमें एक छात्र को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया क्योंकि उसकी स्कूल फीस अभी तक जमा नहीं हो पाई थी। यह घटना सामाजिक मीडिया पर वायरल वीडियो और स्थानीय सुझावों के आधार पर सामने आई है, जिसमें बच्चे को रोते हुए परीक्षा से वंचित बताया जा रहा है।

वायरल पोस्ट/वीडियो के अनुसार, बच्चे के अभिभावक और विद्यार्थी ने बताया कि स्कूल प्रशासन ने फीस की बकाया राशि न होने की वजह से उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी, जिससे परीक्षा केंद्र में उसे रोक दिया गया। इस वीडियो/पोस्ट का व्यापक स्तर पर सोशल मीडिया पर प्रसार हुआ है जिसमें शिकायत और मामला उजागर किया गया है। हालाँकि स्वतंत्र/आधिकारिक समाचार एजेंसी या जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है

📌 मामले का सामाजिक और कानूनी परिप्रेक्ष्य

शिक्षा और बच्चों के अधिकारों से जुड़े नियमों के अनुसार:
• भारत के न्यायालयों (विशेष रूप से उच्च न्यायालय ने) पहले भी स्पष्ट किया है कि फीस की बकाया राशि के कारण किसी छात्र को परीक्षा में बैठने से रोकना उचित नहीं है और यह बच्चे के शिक्षा के अधिकार और जीवन के अधिकार के खिलाफ माना जा सकता है। ऐसा एक मामला दिल्ली हाई कोर्ट ने भी बताया था, जिसमें कोर्ट ने कहा कि छात्रों को फीस न जमा होने की वजह से परीक्षा में बैठने से रोका नहीं जा सकता, क्योंकि शिक्षा और परीक्षा में बैठने का अधिकार भी मूलभूत अधिकार के दायरे में आता है। 

• इसी तरह सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण में यह बताया गया है कि कोई भी बच्चा फीस न भरने की वजह से कक्षा-परीक्षा से निरस्त नहीं किया जा सकता और यह शिक्षा प्रणाली के मूल सिद्धान्तों के विरुद्ध माना जाता है। 

📌 क्या यह मामला केवल सोशल मीडिया आधारित है?

इस समय यह स्पष्ट है कि यह घटना सोशल मीडिया और वायरल वीडियो के माध्यम से सामने आई है, जिसे स्थानीय नागरिकों ने साझा किया है। कोई प्रमुख अखबार या समाचार एजेंसी ने इस समय तक इस मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट या ऑफ़िशियल जानकारी प्रकाशित नहीं की है।
इस कारण घटना से जुड़े विवरण, जैसे कि स्कूल का नाम, प्रशासन का पक्ष, या शिक्षा अधिकारी का बयान, सरकारी स्रोतों या प्रामाणिक मीडिया रिपोर्ट पर आधारित नहीं हैं

📌 शिक्षकों और अभिभावकों के लिए प्रमुख संदेश

• यदि किसी स्कूल द्वारा फीस न होने की वजह से किसी विद्यार्थी को परीक्षा में शामिल होने से रोका जाता है, तो यह कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है
• अभिभावक और विद्यार्थी ऐसे मामलों में स्थानीय शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) या बाल कल्याण समिति (CWC) से शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
• शिक्षा का अधिकार और परीक्षा में बैठने का अधिकार बच्चे के शैक्षणिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है और इसे अक्सर न्यायालयों द्वारा बच्चों के हित में तय किया जाता रहा है।

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