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कुरुक्षेत्र में रामायण-वेद प्रचार करते हुए गिरफ्तार हुआ भगोड़ा, 25 साल पहले हत्या/मारपीट के आरोप में था वांछित


कुरुक्षेत्र/जींद (हरियाणा), 14 दिसंबर 2025 – हरियाणा के जींद जिले की उचाना खुर्द पुलिस ने 25 साल पहले मारपीट के एक मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जो भगोड़ा बनकर वर्षों से आसपास के इलाकों में घूमता रहा और रामायण, महाभारत, संस्कृत तथा वेदों का प्रचार-प्रसार करता रहा

पुलिस की कार्यवाही

पुलिस के अनुसार, आरोपी उचाना खुर्द का निवासी मिथा था। वर्ष 1997 में उस पर पुलिस कर्मचारियों के साथ मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा डालने और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। कोर्ट ने 2001 में उसे 7 साल की सजा सुनाई, लेकिन जमानत मिलने के बाद वह बाहर आ गया और फरार हो गया। तब से वह पुलिस की नजरों से बचता रहा। 

नाम बदलकर धार्मिक प्रचार

पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी मिथा ने अपना नाम बदलकर “कर्मवीर” रख लिया था और वह कुरुक्षेत्र जिले के ग्रामीण इलाकों, स्कूलों और मार्गों पर घूम-घूमकर धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने तथा रामायण, महाभारत, संस्कृत और वेदों का प्रचार करता रहा। ऐसा करने का उद्देश्य उसकी पहचान छिपाए रखना था। 

राजनीतिक या सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले ग्रामीण बताते हैं कि वह अक्सर गांवों में धार्मिक कथाएँ सुनाता, लोगों से वैदिक ग्रंथों के बारे में चर्चा करता और स्वयं को आध्यात्मिक प्रचारक के रूप में प्रस्तुत करता था। 

पकड़ा कैसे गया?

पुलिस ने कई वर्षों तक उसकी तलाश की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चल रहा था। इसी बीच आरोपी द्वारा धार्मिक प्रचार और कार्यक्रमों में भाग लेने का स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस विशेष टीम ने इसके आधार पर उसे कुरुक्षेत्र जिले के गांव चनालहेड़ी से गिरफ्तार कर लिया। 

कोर्ट और आगे की कार्रवाई

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को नजदीकी अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि वह अब आगे की जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेगी।


पृष्ठभूमि एवं तथ्य

  • आरोपी पर 1997 में मामला दर्ज हुआ था और उसे 2001 में सजा सुनाई गई थी। 

  • जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद वह फरार हो गया था। 

  • अपना नाम बदलकर उसने खुद को “कर्मवीर” नाम से पेश किया। 

  • वह कई वर्षों तक धार्मिक प्रचार करता रहा, जिससे उसकी पहचान छिपी रही। 


सम्पादकीय टिप्पणी:
यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि लंबे समय तक फरार चल रहा एक आरोपी, जो धार्मिक प्रचार करता दिखाई देता था, अंततः पुलिस की पकड़ में आया। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि धार्मिक या आध्यात्मिक गतिविधियों के पीछे भी कभी-कभी कानूनी मामलों से बचने के उद्देश्य छिपे हो सकते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में सतर्कता और प्रमाणिकता की आवश्यकता रहती है।

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