बीमार पति की दवा का इंतजाम करना और तीन माह के बेटे का पेट भरना-यह चुनौती फूलवती के लिए रोज़मर्रा की वास्तविकता बन गई थी। मुहल्ला लाइन पार रहने वाली फूलवती के घर में आय का कोई साधन नहीं बचा था।
पति की गंभीर बीमारी में सारी जमा पूंजी खत्म हो चुकी थी।
उमस भरी गर्मी में मंगलवार दोपहर वह सीएएस इंटर कॉलेज के पास, अपने तीन माह के बेटे को गोद में लिए सड़क किनारे थोड़े-थोड़े फल बेच रही थीं। उनके चेहरे पर उम्मीद भरी निगाह थी कि कोई फल खरीद ले।
स्वाभिमान देख आया मदद का विचार
यही समय था जब कस्बे के व्यापारी अमित गुप्ता वहां से गुजरे। फूलवती की स्थिति देख वे रुके और बातचीत की। पता चला कि स्वाभिमानी फूलवती ने किसी से हाथ फैलाने के बजाय खुद काम करने का निर्णय लिया था।
अमित गुप्ता और उनके साथियों ने फूलवती की मदद का फैसला किया। उन्होंने नया ठेला खरीदकर उसे फलों से भर दिया और फूलवती को स्वरोजगार का माध्यम प्रदान किया।
अमित नर सेवा नारायण सेवा के सदस्य हैं। उनके साथ संगठन के संरक्षक दीपक सक्सेना, संयोजक कैलाश बिहारी और धर्मेंद्र शर्मा ने भी इस प्रयास में योगदान दिया। अब फूलवती इसी ठेले पर फल बेचकर अपने परिवार की आर्थिक परेशानियों को कम कर पाएंगी।
फल बेचकर करूंगी बच्चों का पालन
फूलवती ने बताया कि तीन बच्चे हैं और उनका पालन-पोषण कठिन हो रहा था। अब स्वरोजगार का माध्यम मिल गया है। इसी ठेले पर फल बेचकर परिवार को आर्थिक परेशानी से दूर करने का प्रयास करूंगी।
अमित ने बताया कि संगठन की तरफ से फूलवती के परिवार को आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। संगठन के सदस्य अब फूलवती के ठेले से ही फल खरीद करेंगे, ताकि उसका व्यापार बढ़ सके। फूलवती रोज सीएएस इंटर कॉलेज के बाहर ही फलों का ठेला लगाएंगी और आत्मनिर्भर बनेंगी।
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