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केंद्र सरकार के खिलाफ SC पहुंच गई तमिलनाडु को स्टालिन सरकार , कहा कि "हमारे 37 हजार करोड़ दिलवा दो "


लोकसभा चुनाव से ठीक पहले तमिलनाडु और केंद्र सरकार के बीच फंड को लेकर चल रही खींचतान अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार ने शीर्ष अदालत में अर्जी दाखिल कर कहा है कि केंद्र सरकार 37 हजार करोड़ रुपये का फंड नहीं दे रही है, जिसकी प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान से निपटने में जरूरत है।

राज्य सरकार ने अदालत से मांग की है कि वह केंद्र सरकार से कहे कि तमिलनाडु को 37000 करोड़ रुपये की राहत राशि जारी करे। इस रकम से उस नुकसान की भरपाई की जाएगी, जो हाल में आई बाढ़ और मिचौंग चक्रवात से हुआ है।

तमिलनाडु सरकार की अर्जी में कहा गया, 'फंड में देरी करने का कोई भी कारण या ठोस आधार नहीं है। फंड रिलीज करने के मामले में दूसरे राज्यों की तुलना में देरी करना ठीक नहीं है। यह भेदभाव का एक उदाहरण है। यह उन लोगों के मूलभूत अधिकारों का हनन है, जिन्हें आपदा के संकट में परेशानी उठानी पड़ी। उन लोगों के नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती, लेकिन अब राहत भी नहीं पहुंच पा रही है। यह सौतेला व्यवहार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति का भी उल्लंघन करता है। इससे टैक्स के बंटवारे में संघीय ढांचे का जो नियम है, उसका भी उल्लंघन हो रहा है।'

स्टालिन सरकार ने कहा कि राज्य की ओर से कई बार अपील करने के बाद भी अब तक केंद्र ने फंड रिलीज नहीं किया है। राज्य ने कहा कि मिचौंग चक्रवात से हुए नुकसान के मद्देनजर 19,692 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। इसके अलावा अत्यधिक बारिश होने से भी बड़ा नुकसान हुआ और उस संकट से निपटने के लिए 18,214 करोड़ रुपये मांगे गए हैं। स्टालिन सरकार ने कहा कि केंद्र का यह रवैया सूबे के लोगों के मूल अधिकारों का हनन है। इससे राज्य का विकास बाधित होता है और लोगों का मानसिक उत्पीड़न भी होता है। 

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