चरखी दादरी, हरियाणा में इस बार सरसों की सरकारी खरीद की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है। मंडियों में अपेक्षित मात्रा में सरसों नहीं पहुंच रही, जिससे खरीद एजेंसियां भी चिंतित हैं।
जानकारी के अनुसार, कई किसान अपनी सरसों की फसल सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने के बजाय प्राइवेट व्यापारियों को बेच रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि प्राइवेट व्यापारी किसानों को तुरंत भुगतान कर रहे हैं और कुछ मामलों में MSP से अधिक कीमत भी दे रहे हैं।
किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद केंद्रों पर भुगतान में देरी होती है और प्रक्रिया भी काफी जटिल है। इसके चलते वे प्राइवेट व्यापारियों की ओर रुख कर रहे हैं।
वहीं, कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा किसानों को बेहतर सुविधाएं देने की कोशिश की जा रही है और मंडियों में व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति जारी रही तो सरकारी खरीद लक्ष्य प्रभावित हो सकता है और इसका असर आने वाले समय में बाजार व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
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