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हरियाणा में पराली जलाने के बढ़ते मामले, प्रदूषण को लेकर फिर बढ़ी चिंता

 




हरियाणा में एक बार फिर पराली जलाने के मामलों ने सरकार और पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। फसल कटाई के बाद किसानों द्वारा खेतों में बची पराली को जलाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे न केवल वायु प्रदूषण बढ़ रहा है बल्कि आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा समेत कई राज्यों में पराली जलाने के मामलों में इजाफा देखा गया है। हालांकि पंजाब और अन्य राज्यों की तुलना में संख्या कम बताई जा रही है, लेकिन हरियाणा में भी यह समस्या लगातार बनी हुई है।

पराली जलाने से निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को बेहद खराब कर देता है। इससे सांस से जुड़ी बीमारियां, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं। खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक साबित होती है।

सरकार ने इस समस्या को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए सब्सिडी पर मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं, जैसे हैप्पी सीडर और सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम। इसके अलावा पराली न जलाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

इसके बावजूद कई किसान लागत और समय की कमी के कारण पराली जलाने को मजबूरी बताते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब किसानों को सस्ती और आसान वैकल्पिक तकनीक उपलब्ध कराई जाए।

सरकार ने चेतावनी दी है कि पराली जलाने वालों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है ताकि ऐसे मामलों को रोका जा सके।

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