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'गांव में होते तो चूल्हा जला लेते', नोएडा में गैस के लिए कतार में खड़े लोग


पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण देश के कई हिस्सों में एलपीजी की कमी देखने को मिल रही है। लोगों की शिकायतों के बावजूद सरकार ने बार-बार दावा किया है कि ऑनलाइन बुकिंग करने वालों को कुछ दिनों बाद उनके सिलेंडर मिल रहे हैं।

वहीं, दूसरी ओर गैस उपभोक्ता बुकिंग के बावजूद कई दिनों तक गैस सिलेंडर न मिलने की शिकायत कर रहे हैं।

रविवार को नोएडा में एक गैस एजेंसी के बाहर जमा हुए लोगों ने वैध घरेलू गैस उपभोक्ता कार्डों के आधार पर बुक किए गए सिलेंडरों पर भी लंबे इंतजार की शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी अक्सर यह दावा करती है कि बुकिंग सर्वर समस्याओं और कंप्यूटर लिंक के बंद होने के कारण नहीं हो पा रही है। रविवार को नोएडा के सेक्टर 5 स्थित हरौला गांव में भारत गैस की एक एजेंसी के बाहर लगभग 300 लोग जमा थे। उनके सिलेंडरों की कतार गली के अंत तक फैली हुई थी। उनमें से कुछ ने बताया कि वे सुबह 4 बजे से इंतजार कर रहे थे।

बुधवार को इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर एजेंसी के बाहर पहुंचे तो उसके शटर गिरे हुए थे। बाहर एक नोटिस में लिखा था, “भारत पेट्रोलियम का पोर्टल न चलने के कारण गैस का कोई काम नहीं किया जा सकता है। पोर्टल काम करना शुरू होने के बाद काम फिर से शुरू होगा।”

कई परिवारों के पास ब्लैक में गैस खरीदने के पैसे नहीं

एजेंसी के बाहर 45 साल की गुलाबी देवी अपने खाली गैस सिलेंडर के साथ जमीन पर बैठी थीं। रविवार को गुलाबी ने एक कागज का टुकड़ा पकड़ रखा था जिस पर पेन से ‘146’ लिखा हुआ था। वितरक ने सुबह करीब 10 बजे पर्चियां बांटी थीं। गुलाबी देवी को अपना सिलेंडर तब मिलेगा जब कतार में उससे आगे खड़े 145 अन्य लोगों के कार्ड पर मुहर लग जाएगी और वे कुछ मीटर दूर खड़ी एक ट्रक से अपना सिलेंडर ले लेंगे। उन्होंने कहा, "मेरा कनेक्शन 12 साल पुराना है। चार दिन पहले गैस खत्म हो गई थी। हमने ऑनलाइन बुकिंग की और इंतजार किया। आज सुबह मैं यहां आई। लेकिन मुझसे पहले ही कई लोग यहां पहुंच चुके थे।”

गुलाबी ने बताया कि उनके पति कबाड़ की दुकान में दिहाड़ी पर काम करते हैं और उनके पास ब्लैक में गैस खरीदने के पैसे नहीं हैं। उन्हें सिलेंडर मिलेगा या नहीं, इसी से तय होगा कि उन्हें ठीक से खाना मिलेगा या फिर उन्हें ठंडे चिवड़ा से ही काम चलाना पड़ेगा । उन्होंने कहा, "अगर यह बिहार में हमारा गांव होता तो हम कोयले के चूल्हे पर खाना बना लेते लेकिन यहां हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।"

ज्योति नाम की एक महिला यह जांचने के लिए दीवार पर चिपके कागजों में चेक कर रही थीं कि सिलेंडर पाने वालों की सूची में उसका नाम है या नहीं। उन्होंने कहा, "मैंने ऑनलाइन बुकिंग की थी और मुझे मैसेज मिला कि डिलीवरी हो चुकी है लेकिन मुझे अभी तक डिलीवरी नहीं मिली है। लोगों ने मुझे डीलरशिप से पता करने को कहा इसलिए मैं यहां आई हूं।"

अधिकारियों का दावा- स्टॉक की कमी नहीं

बुधवार को, एजेंसी के एक अधिकारी ने आश्वासन दिया कि स्थिति में सुधार हो रहा है और लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। अधिकारी ने दावा किया कि लोगों ने अपने केवाईसी (पहचान पंजीकरण विवरण) को अपडेट करने में देरी की थी और अब गैस सिलेंडर न मिलने के डर से एजेंसी में भीड़ लगा रहे हैं।

अधिकारी ने कहा, "हमारे पास स्टॉक की कमी नहीं है। हम लोगों से सालों से अपना केवाईसी करवाने के लिए कह रहे हैं। अब सभी लोग कतार में लगे हुए हैं। कुछ लोगों ने ओरिजिनल मालिक की मृत्यु के बाद अपने कनेक्शन को ट्रांसफर नहीं करवाया था और अब वे इसे करवाना चाहते हैं क्योंकि केवाईसी को अपडेट करना जरूरी है।”

दिल्ली में अवैध LPG रैकेट का भंडाफोड़

इजरायल-ईरान युद्ध के कारण भारत में हुए घरेलू गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच दिल्ली पुलिस ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने संगम विहार इलाके में अवैध एलपीजी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने डिलीवरी एजेंटों के गोदामों से कुल 183 इंडेन गैस सिलेंडर बरामद किए हैं, जिनमें से 154 भरे हुए और 29 खाली थे।

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