हड़ताल के कारण
डॉक्टरों की मुख्य मांग एसएमओ (सीनियर मेडिकल ऑफिसर) पदों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की सीधी भर्ती तुरंत रोकना है, क्योंकि इससे 20 साल सेवा करने वाले मौजूदा चिकित्सा अधिकारियों की पदोन्नति रुक जाएगी। एसोसिएशन का कहना है कि यह करियर सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है और पूरे देश में ऐसी कोई प्रथा नहीं है। इसके अलावा, एसीपी (अश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) योजना लागू करने और वेतन-सेवा संबंधी मांगें पूरी करने की मांग भी है।
प्रभाव और सरकार की प्रतिक्रिया
हड़ताल के पहले दिन सोमवार सुबह से ही पंचकूला, हिसार जैसे जिलों के सिविल अस्पतालों में OPD काउंटर खाली पड़े रहे, मरीज लंबी कतारों में भटकते नजर आए। कुछ जगहों पर मुलाना मेडिकल कॉलेज से अस्थायी डॉक्टर बुलाए गए। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. मनीष बंसल ने बातचीत से समाधान की अपील की, जबकि सरकार ने 600+ रिक्त विशेषज्ञ पदों का हवाला देकर भर्ती जारी रखने पर जोर दिया। कुछ विशेषज्ञ डॉक्टर हड़ताल से अलग रहकर OPD चला रहे हैं।
आगे की स्थिति
सरकार और डॉक्टरों के बीच शनिवार को कई दौर की बैठकें हुईं, लेकिन कोई सहमति नहीं बनी। अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो हड़ताल बढ़ सकती है। मरीजों को निजी अस्पतालों या इमरजेंसी में ही भरोसा करना पड़ रहा है।��
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