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दिल्ली NCR के लिया खतरा बना हरियाणा का नूह इलाका , जानिए कैसे ?



गुरुग्राम : दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा को साफ करने की कोशिश हो रही है। इसी बीच हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर पर कुछ ऐसा हो रहा है जो दिल्ली-एनसीआर की इन कोशिशों को खराब कर रहा है। यह है नूंह में अरावली की पहाड़ियों के बीच केमिकल वेस्ट को जलाया जाना। यहां पर जलने वाले इस केमिकल वेस्ट से जहरीला धुआं निकल रहा है और यह दिल्ली-एनसीआर के लिए खतरा बन रहा है।

दिल्ली-एनसीआर की हवा को साफ करने के लिए चार राज्यों की सरकारें, केंद्र, सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के प्रयास जारी हैं। कई योजनाएं चलाई जा रही हैं और सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। नूंह का केमिकल वेस्ट धुआं इन सब पर पानी फेर रहा है।

दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप लागू
दिल्ली- एनसीआर में ग्रैप लागू है। एनजीटी ने पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों पर रोक लगा रखी है। लोगों पर इसका असर पड़ रहा है। लेकिन, दूसरी ओर बड़े पैमाने पर इंडस्ट्रियल वेस्ट को जलाया जा रहा है। इससे इलाके में प्रदूषण का स्तर और भी बढ़ रहा है।

राजस्थान से रात को आ रहा वेस्ट
इंडस्ट्रियल इलाके से यह केमिकल वेस्ट राजस्थान से ट्रकों में भरकर रात के समय लाया जा रहा है। फैक्ट्री मालिक यह इसलिए कर रहे हैं ताकि उनका खर्च बच सके। कानूनी तरीके से वेस्ट को डिस्पोज करने का जो तरीका है, उसके लिए फैक्ट्री मालिकों को 10 से 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खर्च करना पड़ता है। वे इसे बचाने के लिए इस वेस्ट को बिचौलियों को दे देते हैं।

खोरी कलां गांव की जमीन झुलसी
यह औद्योगिक कचरा जहां जलाया जाता है, उसकी ज्यादातर भट्टियां नूंह के खोरी कलां और खोरी खुर्द गांवों में हैं। यहां पर केमिकल से ट्रीट किए गए इंडस्ट्रियल स्क्रैप, प्लास्टिक और रबर को लकड़ी के साथ मिलाकर जला दिया जाता है। खोरी कलां में अरावली की लगभग 2000 वर्ग मीटर जमीन इस औद्योगिक कचरे को जलाने से झुलस गई है। यह काम रातोंरात किया जाता है, इसलिए सुबह आग बुझ जाता ही। आग भले ही बुझ जाती हो लेकिन हवा में एक तीखी गंध जरूर महसूस होती है। यह गंध सांस लेने में तकलीफ देती है।

स्थानीय लोगों ने बयां किया दर्द
खोरी कलां के एक स्थानीय निवासी अहमद ने कहा कि हम पिछले 15 सालों से परेशान हैं। यहां पर गुपचुप औद्योगिक कचरा जलाया जाता है। वस्ट जलाने की गतिविधियां अब और बढ़ गई हैं। इन इलाकों में औद्योगिक कचरा नीतियों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि ‘रेड’ कैटेगरी वाली ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रीज को दिल्ली- एनसीआर से बाहर कर दिया गया है। अब उन्होंने भिवाड़ी जैसी जगहों पर अपना ठिकाना बना लिया है और अब वहां प्रदूषण बहुत ज़्यादा बढ़ गया है।

ट्रांसपोर्टर ने बताया कैसे होता है खेल
एक और निवासी उश्मीद ने आरोप लगाया कि इस धंधे में प्रभावशाली लोग शामिल हैं। हर रात गांव के आसपास छोटी-छोटी आग दिखती हैं। बुरी गंध आती है। उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्टर और भट्टी के मालिक इस खतरनाक कचरे को डिस्पोज करने के लिए 2-5 रुपये प्रति किलो के हिसाब से कमाते हैं। इस तरह यह औद्योगिक कचरा डिस्पोज करने का एक बड़ा काला बाजार तैयार हो गया है। एक स्थानीय ट्रांसपोर्टर ने कहा कि फैक्ट्री मालिक हमसे संपर्क करते हैं, क्योंकि हम उनके बहुत कम खर्च में उनका कचरा ले लेते हैं। हम अगर 5 रुपये प्रति किलो भी लेते हैं तो महीने के आखिर तक हमें खूब कमाई हो जाती है।

ऐसे करते हैं डिस्पोज
खोरी कलां के एक और ट्रांसपोर्टर ने बताया कि इलाके में हर रात औसतन 10 से 15 ट्रक या ट्रैक्टर-ट्रॉली गांवों में कचरा लेकर आते हैं। वे लगभग 10 टन वेस्ट लाते हैं। ये ड्रमों में भरा होता है ताकि उतारने में समस्या न हो। ड्रमों को उतारकर कचरा सीधे गड्ढों में पलट दिया जाता है और केमिकल डालकर आग लगा दी जाती है। सुबह तक यह पूरी तरह जल जाता है।

अवैध डंपिंग के खिलाफ केस, पर एक्शन नहीं
HSPCB की रीजनल ऑफिसर नूंह आकांक्षा तंवर ने कहा कि सारा वेस्ट राजस्थान के भिवाड़ी, खुश खेड़ा और धारूहेड़ा के इंडस्ट्रियल हब से आता है। हमने इस मामले में राजस्थान प्रदूषण बोर्ड को खत लिखा है। वन विभाग ने 27 जून को ओम कार्गो लॉजिस्टिक्स, पीजी टेक्नोप्लास्ट प्राइवेट लिमिटेड और ग्रेस्योर फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के खिलाफ अवैध डंपिंग के लिए तावडू सदर पुलिस स्टेशन में तीन शिकायतें दर्ज कराई हैं। वन अधिकारी ने कहा कि हमने दो एफआईआर दर्ज की हैं। जिला प्रशासन को भी लेटर लिखा है।

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