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दिल्ली होगी राममय, मिलेगी सभी सुविधाएं: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

 




नवरात्र के अवसर पर राजधानी में रामलीलाओं के मंचन को परेशानियों से बचाने और मंचन के लिए दी जाने वाली अनुमतियों का समुचित निदान कर दिया गया है। अब रामलीला मंचन के लिए सारी औपचारिकताएं जिलों में डीएम कार्यालय स्तर पर ही सुलझा दी जाएंगी। सरकार इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाने जा रही है। एक बड़ा निर्णय यह भी लिया गया है कि अन्य मसलों को लेकर एक विशेष समिति का भी गठन कर दिया गया है, ताकि रामलीला मंचन व अन्य मामलों में किसी प्रकार की अड़चन न आए। यह निर्णय आज राजनिवास में उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में आयोजित एक विशेष बैठक में लिया गया। बैठक में मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, दिल्ली रामलीला महासंघ के पदाधिकारी व संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

रामलीला मंचन को लेकर लिए गए निर्णयों व सुविधाओं की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने बताया कि इस बार राजधानी में रामलीला का मंचन 22 सितंबर से 02 अक्टूबर तक होने जा रहा है। राजधानी में रामलीला मंचन का इतिहास बहुत पुराना है और आधुनिक युग में भारी व्यस्तता के बावजूद आज भी दिल्लीवासी रामलीलाओं को देखने में विशेष रुचि दिखाते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार उन्हें जानकारी मिली है कि राजधानी में 600 रामलीलाओं का मंचन किया जाता है। इनमें से 100 बड़ी रामलीलाओं का मंचन भव्य तरीके से होता है। मुख्यमंत्री का कहना है कि पिछले कुछ सालों से रामलीला आयोजकों को मंचन के लिए कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। उन्हें जमीन मिलने में देरी होती थी, साथ ही कई प्रकार के एनओसी के चलते रामलीला मंचन में दिक्कतें आ रही थीं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि अब रामलीला मंचन के लिए सारी अनुमतियों के लिए जिला स्तर पर डीएम की अगुवाई में सिंगल विंडो सिस्टम बनाया जा रहा है, जहां से रामलीला मंचन के लिए सभी तरह के एनओसी जारी किए जाएंगे। उन्होंने यह जानकारी दी कि रामलीला मंचन के लिए भूमि की सिक्योरिटी राशि को 20 रुपये वर्गमीटर से घटाकर 15 रुपये वर्गमीटर किया जा रहा है। एक बड़ा निर्णय यह भी लिया गया है कि रामलीला मंचन के साथ बनने वाले मनोरंजन स्थलों का क्षेत्रफल मिलने वाले कुल क्षेत्रफल का 40 प्रतिशत किया जा रहा है। पहले यह 25 प्रतिशत था। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मनोरंजन स्थल में लगने वाले झूले व खाने-पीने के स्टॉल को लेकर कभी-कभी आपसी विवाद हो जाता था। अब समय पर ही ऐसे विवाद का निवारण करने के लिए डीडीए के उप-निदेशक स्तर के अधिकारी व दिल्ली रामलीला महासंघ के दो पदाधिकारियों की एक समिति बना दी गई है। जरूरत पड़ने पर यह समिति विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर विवादों का निपटारा कर देगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि पिछले दिनों रामलीला मंचन के आयोजकों ने उनसे मुलाकात कर कुछ समस्याओं की ओर उनका ध्यान इंगित किया था। उनका कहना था कि मंचन के लिए उन्हें विभिन्न विभागों से एनओसी लेनी पड़ती है, जिसके लिए उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कभी उन्हें डीडीए से परेशानी होती है, तो कभी नगर निगम के बागवानी विभाग से एनओसी मिलने में देरी लगती है। उन्होंने कई अन्य समस्याएं भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं और उनके समाधान का अनुरोध किया था। आयोजकों ने यह भी सुझाव दिया कि इस बार दिल्ली सरकार रामलीला स्थलों पर एक-एक एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए, नियुक्त करे, ताकि आपात स्थिति में उसका लाभ लिया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की बैठक में लिए गए निर्णयों के बाद आयोजकों को रामलीला मंचन में किसी प्रकार की समस्या नहीं आएगी।

मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि भगवान श्रीराम विश्वरूप हैं, इसीलिए करोड़ों लोगों में उनकी गहरी आस्था है। दिल्ली के लोग भी भगवान श्रीराम को लेकर गहरा भक्तिभाव रखते है और यह आस्था पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। यही कारण है कि राजधानी में वर्षों से रामलीलाओं का भव्य आयोजन होता रहा है, जिसमें लोगों की सक्रिय भागीदारी हमेशा दिखती है। मुख्यमंत्री के अनुसार रामलीला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए रखती है। सरकार का यह कदम परंपरा के संरक्षण और समाजिक एकता को सशक्त करेगा।

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