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सितंबर में भी जारी रहेगी तबाहीः पहले ही दिन इन राज्यों में रेड अलर्ट



शिमला। हिमाचल प्रदेश में भारी बरसात का दौर नहीं थम रहा है। प्रदेश में आज ऊना, बिलासपुर, शिमला, साेलन व सिरमौर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है व इन जिलों में भारी बारिश हो रही है। कल भी मौसम राहत नहीं देगा। पहली सितंबर सोमवार को छह जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। सितंबर में भी मौसम राहत देने वाला नहीं लग रहा है।

सितंबर महीने के पहले ही दिन मौसम कड़ी चुनौती देगा। सोमवार को कांगड़ा, मंडी, ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर व सिरमौर में भारी बारिश का रेड अलर्ट रहेगा। इसके अलावा चंबा, कुल्लू, शिमला, किन्नौर व लाहुल स्पीति में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। सोलन में बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है।

चारस्तरीय प्रक्रिया में चलाया राहत एवं बचाव कार्य
बाढ़, भूस्खलन और अतिवर्षा की वजह से मची तबाही में राहत व बचाव कार्य को चार स्तरीय प्रकिया के तहत किया जा रहा है। जिसमें पटवारी और ग्राम पंचायत के स्तर से तहसीलदार, एसडीएम, जिला उपायुक्त और राज्य स्तर पर लागू किया गया है।

चंबा व भरमौर में चल रहा सबसे बड़ा अभियान
सबसे बड़ा राहत एवं बचाव कार्य चंबा और भरमौर में चलाया ला रहा है, जहां पर मणिमहेश यात्रा के दौरान फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला जा रहा है। इसमें एनडीआरएफ यानी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के अलावा एसडीआरएफ राज्य आपदा मोचन बल, पुलिस, सेना और स्थानीय युवाओं और गृहरक्षक व नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवकों के सहयोग से बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

आपदा प्रभावित जिलों में पुलिस अधिकारी भी मोर्चे पर
सड़कों के पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होने पर हेलीकाप्टर की मदद से लोगों को सुरक्षित निकालने के अलावा उन तक राशन पहुंचाया जा रहा है। जहां पर जान माल का नुकसान हुआ है उन तक राहत पहुंचाने के लिए अधिकारी मौके पर जाकर राहत पहुंचा रहे हैं। उधर, संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक, डीएसपी और अन्य पुलिस अधिकारी व जवान भी राहत एवं बचाव कार्य में शामिल हैं।

तीन एनएच सहित 600 सड़कें बंद
प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा और भूस्खलन के कारण दो से तीन एनएच और 600 सड़कें बंद हैं। इसके कारण यातायात सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित हो रही हैं। इसके बावजूद राीत एवं बचाव कार्य पहुंचाने के लिए सुरक्षा बलों, स्थानीय स्वयं सेवकों की मदद ली जा रही है।

नियंत्रण कक्ष स्थापित
राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष के अलावा हरे जिले में 24 घंटे सातों दिन दिन जिलास्तरीय नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किए गए हैं। इन नियंत्रण कक्षों के माध्यम से राहत एवं बचाव कार्य को चलाया जा रहा है।

तीन हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान
प्रदेश में अभी तक 20 जून को मानसून के प्रवेश करने से लेकर अभी तक कुल 166 लोगों की बाढ़, भूस्खलन, बादल फटने और अन्य कारणों से मौत हो चुकी है। जबकि 3042 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज हो चुका है।

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