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रोहतक के खरक जाटान गांव में 24 घंटे का बंद, 300 साल पुरानी परंपरा का पालन

रोहतक के खरक जाटान गांव में शुक्रवार रात 12 बजे से शनिवार रात 12 बजे तक 24 घंटे का संपूर्ण बंद लगाया गया। इस दौरान गांव में न तो कोई बाहर गया और न ही कोई अंदर आया। यह बंद 300 साल पुरानी एक परंपरा के तहत लगाया जाता है, जिसका उद्देश्य सामाजिक दूरी बनाकर बीमारियों के फैलाव को रोकना है।  

किंवदंती के मुताबिक, पुराने दौर में गांव में बच्चों और पशुओं में बीमारी फैल गई थी और एक साधु ने सभी को एक दिन तक गांव से बाहर व अंदर आने-जानने से बचने की सलाह दी थी। इस परंपरा को भाद्रपद माह के अंतिम शनिवार को पूरा किया जाता है। गांव के लोग इसे सोशल डिस्टेंसिंग का एक प्रभावी तरीका मानते हैं ताकि बीमारी का चक्र टूट सके।  

इस दिन गांव में किसी के घर नए भोजन बनाने की अनुमति नहीं होती, बल्कि पहले से बनाया मीठा खाना जैसे खीर, मीठी रोटी, गुलगुले खाना अनिवार्य होता है। साथ ही, मंदिर में और गांव में गुग्गल व लोबान की धूनी लगाई जाती है ताकि संक्रमण नियंत्रित हो सके। महिलाएं सत्संग करती हैं और युवा नाच-गाना करते हैं, इसे त्योहार जैसा मनाया जाता है।  

गांव के लोग इस दिन अपने जरूरी काम पहले ही निपटा लेते हैं और जो परिवार शहर में रहते हैं, वे भी एक दिन पहले गांव लौट आते हैं। यह परंपरा न सिर्फ बीमारी से बचाव का उपाय है, बल्कि गांव में सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान भी बनाए रखती है।  


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