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हिंदुओं को एकत्र कर भारत को हिंदूराष्ट्र बनाना असंभव; शंकराचार्य निश्चलानंद का बड़ा बयान


गोवर्धनमठ पुरी के पीठाधीश्वर शंकराचार्य निश्चलानंद ने झूंसी शिवगंगा आश्रम में प्रवास के दूसरे दिन रविवार को हिंदूराष्ट्र संगोष्ठी में कहा कि सबको इकट्ठा करके भारत को हिंदूराष्ट्र नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि हिंदुओं को संगठित करना तराजू पर मेढक तौलने जैसा है।

हिंदुओं में पद, प्रतिष्ठा पाने की लालसा अधिक होती है, सबको संतुष्ट नहीं किया जा सकता है। कार्य करने की एक शैली होती है, हम अपना कार्य करते जा रहे हैं। सबको इकठ्ठा करने चलेंगे तो विप्लव हो जाएगा।

नेपाल से आए एक दंपती की जिज्ञासा का मार्गदर्शन करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि नेपाल को हिंदूराष्ट्र बनाने के प्रति मेरी आस्था थी। नेपाल को चीन की कुटिल चालों से भी बचाना चाहते थे, इसी भाव से नेपाल की कई यात्राएं भी की थीं किंतु नेपाल की विचित्र दिशाहीनता देख व्यथित हो गया और उधर से अपना ध्यान ही हटा लिया। शंकराचार्य ने कहा, सत्ता लोलुपता और स्वार्थ की पराकाष्ठा तो देखिए, नेपाल के अनमोल ग्रंथागार को जलाने वाले दिशाहीन प्रचंड जैसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री बना दिया गया। नेपाल के राजनीतिज्ञ चीन की कूटनीति के आगे नतमस्तक हैं।

शंकराचार्य ने कहा कि दक्षिण भारत में समुद्र के अंदर राम सेतु को काल्पनिक बता कर उसे तोड़ने का प्रयास किया गया। रामसेतु की रक्षा के लिए दक्षिण भारत की यात्राएं की। वहां एक व्यक्ति सुब्रह्मण्यम स्वामी के साथ देने पर बड़ा आंदोलन खड़ा कर रामसेतु को तोड़ने से बचाया गया। संगोष्ठी में शंकराचार्य के निजी सचिव निर्विकल्पनंद ब्रह्मचारी, प्रफुल्ल ब्रह्मचारी, हृषिकेश ब्रह्मचारी, राम कैलाश पांडेय, मीडिया प्रभारी विवेक मिश्र, दीपक शुक्ला, राजीव मिश्र राणा, मनोज त्रिपाठी, सुरेंद्र पांडेय, बीपी सिंह, आरके पांडेय, आदेश भूषण, आयुष सिंह, सत्यम शुक्ला आदि मौजूद रहे।

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