अम्बाला छावनी:-आम आदमी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष चित्रा सरवारा आज अंबाला कैंट के सदर बाजार की दुकानों के आगे प्रशासन द्वारा तोड़े जा रहे थडों के विरोध में मौके पर पहुंच कर प्रशासन के पंजे को रुकवाया और अधिकारियों के सम्मुख जनता का पक्ष रखते हुए कारवाई को स्थगित कराया। चित्रा ने मौके पर अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए म्युनिसिपल इंजीनियरिंग व अन्य अधिकारियों से कहा कि तोड़ने से पहले दुकानदारों को कोई नोटिस दिया और बीना बाजार एसोसिएशन से कोई बात किए बिना ये कारवाई हर पहलू से गलत है और प्रशासन को रोकनी पडेगी।
बिना निशानदेही,बिना नोटिस,बिना बातचीत के इस तोडफोड पर चित्रा ने सवाल करे तो अधिकारियों ने कहा कि उन पर कोई प्रशासनिक या न्यायिक बाध्यता नहीं थी किसी को नोटिस देने की। अधिकारियों के गोलमोल और जनविरोधी रवैये पर चित्रा ने कहा की पहले जेसीबी वापिस हो,निशानदेही हो,जिससे साफ़ हो कौन सी जगह सरकारी है और कौन सी सार्वजानिक, लोगों को आपत्तियां दर्ज कराने और निपटाने का समय मिले, बाजार एसोसिएशन से बैठकर बातचीत हो, प्रशासनिक कार्यवाही का शेड्यूल बने, प्रशासन फुटपाथ बनाने और रिपेयर का समय निर्धारित करे। इसके बाद ही कोई अतिक्रमण हटाने पर काम करे।वरना दुकानदार और हम सरकार के इस फैसले का विरोध करेंगे।
इस अवसर पर चित्रा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा की सदर बाजार में डेकोरेशन के नाम पर सरकार दुकानदारों को उजाड़ना बन्द करे। चित्रा ने कहा की दुकानदार बाढ़ के प्रकोप से अभी उभरा नहीं ऐसे में अतिक्रमण के नाम पर दुकानदारों का लाखों का नुकसान और करना दिखाता है कि सरकार अम्बाला की जनता की तरफ एक सौतेली माँ का नजरिया रखती है। आज अम्बाला में अनेको फ़ैक्टरी डूबी पडी हैं,कॉलोनियों मे पानी ज्यूं का ट्यू अटा पड़ा है लेकिन प्रशासन को अचानक बाजारों का अतिक्रमण प्राथमिकता पर दिखने लगा? प्रशासन को अपना सारा जोर बाढ़ से आयी मुसीबतों को निपटाने में लगाना चाहिए या अतिक्रमण के नाम पर जानता और दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ाने में?
अचानक इस प्रशानिक धावे पर सवाल उठाते हुए चित्रा ने कहा कि दुकानदारों को अतिक्रमण के सन्दर्भ में तोड़फोड़ का नोटिस क्यूँ नहीं दिया गया जिससे दुकानदार कोई वैक्लपिक व्यवस्था कर सकते? चित्रा ने कहा की अम्बाला दुखी हो चुका है विकास ने नाम पर पिछली 9 सालों से उखड़ी पडी सड़कों से सड़क में गड्डा है या गड्ढे में सड़क ये समझ नही आ रहा । पहले नाले के पाइप डालने के नाम पर लगभग 3 महीने तक धंदे बन्द रहे।दुकानदारों ने अपनी जेब से शोरूम के किराए दिए और जब प्रशासन द्वारा कोई मुरम्मत शुरू नहीं की गई तो लाखो रुपये लगाकर खुद थड़े बनाने पर मजबूर हुए । अब बाढ़ के बाद उन्होंने अपनी दुकानदारी शुरू ही करी थी कि अतिक्रमण के नाम पर नगर परिषद के अधिकारी फिर से उनकी दुकानों के थड़े तोड़ने पहुँच गए।
चित्रा ने कहा अगर अतिक्रमण हटाना ही है तो प्रशासन अलग-अगल मार्केट असोसिएशन के साथ एक बैठक कर शेड्यूल तैय्यार करे कि कौन-से मार्केट में कब काम करेंगे। दुकानदारों को निशानदेही पर आपत्ति जताने और सुलझाने के लिए समय दे। सारी साँझ बनने और आपत्तियों को सुलझाने के बाद प्रशासन मार्केट को कम से कम एक हफ्ते का समय दे। जिसमें वह स्वयं अपने खून पसीने की गाड़ी कमाई से बने समान का नुकसान जहां तक मुमकिन हो बचा सकें और सबसे महत्त्वपूर्ण बात है कि सरकार अगर तोड़ने का समय निर्धारित करेगी तो दुकानदारों को वापिस मुरमत करके फुटपाथ बनाने का समय भी पहले निर्धारित करे।
चित्रा ने कहा आगे आ रहे त्योहारों को देखते हुए दुकानदारों को बेवजह तंग करने की बजाएं दुकानों के आगे निशानदेही करे और पहले एक बाजार के एक कोने से दूसरे कोने तक के थड़े तोड़े उनको बनाने के बाद दूसरे बाजारों का काम फिर शुरु किया जाए। ताकि जिस बाजार का काम चल रहा हो उसके इलावा बाकी के बाजारों को दिक्कतों का सामना ना करना पड़े।
चित्रा ने कहा की पहले ही ये दुकानदार कभी कोरोना कभी बाढ़ के नाम अनेको दिक्कतों का सामना कर रहे है पहले ही बाढ़ से दुकानदारों का करोड़ो रूपये का माल खराब हो चुका है। अब त्योहारों के दिन शुरू होने वाले है तो अब बाजारों में फिर से तोड़फोड़ शुरू हो जाएगी तो ये दुकानदार कहा से कमाएंगे और कहा से शोरूम का किराया देगे। प्रशासन को त्योहारों को देखते हुए इस और भी ध्यान देना चाहिए की जिस बाजार को तोड़े पहले एक हफ्ते में उस ही बाजार का काम खत्म करें सारे बाजारों का काम एक साथ ना शुरू करे। एक काम को खत्म करें फिर दूसरे काम को शुरू करे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान हालातों में काम धंधे ठप होने के कारण वैसे ही दुकानदारों को अपने परिवार की जिम्मेवारियां निभाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई और काम धंधे ठप होने के कारण अनेको दुकानदारों को अपने शोरूम खाली करने पड़ रहे है। ऐसे में खून पसीने की गाढ़ी कमाई से बनाई गई दुकानों पर बुलडोजर चलने का मतलब है कि एक पूरे परिवार की उम्मीदों का सफाया किया जा रहा है।
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